1970 के दशक की बात है. उत्तराखंड तब उत्तर प्रदेश का ही हिस्सा हुआ करता था. तत्कालीन सरकार ने प्रदेश के पहाड़ी इलाक़ों में हज़ारों पेड़ों की नीलामी का फ़ैसला किया था. इनका एक बड़ा हिस्सा चमोली जिले के उन जंगलों में पड़ता था जिन पर स्थानीय ग्रामीण अपनी आजीविका के लिए निर्भर थे. जब इनके कटने की बारी आई तो लोगों ने इसका ज़बरदस्त विरोध किया. इस विरोध का नेतृत्व मुख्यतः महिलायें कर रही थीं.

उस वक्त गौरा देवी अपनी तमाम साथिनों के जंगल के पेड़ों से लिपट गईं और यहां के किसी पेड़ को उन्होंने कटने नहीं दिया. इस विरोध ने आगे चलकर आंदोलन का रूप लिया और यही सारी दुनिया में ‘चिपको आंदोलन’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ. इसके साथ ही चमोली जिले की इन महिलाओं का नाम हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो गया.

इस घटना के लगभग 45 साल बाद चमोली जिले की महिलाएं एक बार फिर से चर्चाओं में हैं. इस बार भी मामला पर्यावरण से ही जुड़ा है. लेकिन इस बार वजह बिलकुल उल्टी है. इस बार चमोली की महिलाएं पर्यावरण को नुक़सान पहुंचाने वालों की रेवड़ियां लूटने के चलते चर्चाओं में आ रही हैं. इन महिलाओं का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हो रहा है. यह वीडियो चमोली जिले के औली में आयोजित हुई उस शादी का है जो कई कारणों से विवादों में रही. वीडियो में स्थानीय महिलाएं इस बात से नाराज़ लग रही हैं कि शादी के आयोजकों ने अन्य महिलाओं को तो साड़ी और शगुन भेंट किए लेकिन उनका ‘सत्कार’ अच्छे से नहीं किया गया.

चमोली का औली क्षेत्र अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है. देश-दुनिया से लोग यहां फैले मखमली घास के मैदानों को देखने पहुंचते हैं. लेकिन बीते दिनों यह इलाक़ा ‘दो सौ करोड़ की शादी’ के चलते सुर्खियों में रहा. यह शादी विवादित कारोबारी अजय और अतुल गुप्ता के बेटों की थी. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रहने वाले गुप्ता बंधु बीते कई सालों से दक्षिण अफ़्रीका में रह रहे थे. अफ़्रीकी राजनीति में गुप्ता बंधुओं का बेहद मज़बूत हस्तक्षेप माना जाता है.

गुप्ता बंधुओं पर आरोप हैं दक्षिण अफ़्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा के साथ वे भ्रष्टाचार के कई मामलों में संलिप्त रहे हैं. जैकब ज़ूमा के बेटे के साथ गुप्ता बंधुओं के कई व्यावसायिक संबंध रहे हैं जिनकी इन दिनों जांच चल रही है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया की मानें तो जैकब ज़ूमा के इस्तीफ़े का बड़ा कारण भी गुप्ता बंधुओं द्वारा किया गया भ्रष्टाचार ही था. और उनके इस्तीफ़े के बाद गुप्ता बंधुओं के पास दक्षिण अफ़्रीका छोड़ने के अलावा कोई विकल्प बाक़ी नहीं बचा था.

देश में गुप्ता बंधु बीते एक पखवाड़े से चर्चाओं में हैं. यह चर्चा तब शुरू हुई जब ख़बर आई कि उत्तराखंड के औली क्षेत्र में गुप्ता बंधुओं के बेटों की शादी का आयोजन होने जा रहा है. कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों ने इस आयोजन का विरोध किया. इस विरोध के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने बयान दिया कि उन्होंने ही गुप्ता बंधुओं को उत्तराखंड में शादी आयोजित करने के लिए आमंत्रित किया है ताकि प्रदेश में ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ को बढ़ावा मिले. लेकिन मुख्यमंत्री का यह बयान लोगों के गले इसलिए नहीं उतरा क्योंकि उत्तराखंड सरकार के पास न तो ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ आयोजित करने की कोई नीति है, न इस संदर्भ में कभी सरकार ने कोई सार्वजनिक घोषणा या अपील जारी की है और न ही ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ से प्रदेश के पर्यटन को बढ़ावा देने जैसी कोई योजना त्रिवेंद्र सरकार ने कभी लागू की.

उत्तराखंड के औली में गुप्ता बंधुओं के बेटों का विवाह स्थल
उत्तराखंड के औली में गुप्ता बंधुओं के बेटों का विवाह स्थल

प्रदेश के मुखिया से हरी झंडी मिलते ही औली क्षेत्र में गुप्ता बंधुओं के हेलिकॉप्टरों की गड़गड़ाहट शुरू हो गई. औली के प्राकृतिक ढालों पर अस्थायी हेलिपैड काट दिए गए और जिन इलाक़ों में न्यायालय ने अस्थायी टेंट लगाने तक को भी प्रतिबंधित किया है उन इलाक़ों में गुप्ता बंधुओं के शादी समारोह के लिए बाहुबली फ़िल्म जैसे बड़े-बड़े सेट बनाए जाने लगे. नियमों की ऐसी अनदेखी के चलते कुछ सामाजिक कार्यकर्ता इस शादी पर रोक लगाए जाने की मांग को लेकर उत्तराखंड हाई कोर्ट भी पहुंचे. कोर्ट ने प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए सवाल उठाए कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में शादी के आयोजन की अनुमति कैसे दी गई और गुप्ता बंधुओं को तीन करोड़ रुपए जमा करने के भी आदेश दिए ताकि पर्यावरण को हुई हानि की भरपाई की जा सके. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला अगर उसके संज्ञान में कुछ और पहले आया होता तो शादी पर रोक लगाना ही उचित होता.

हाई कोर्ट की सख़्त टिप्पणी के बाद भी प्रदेश सरकार इस आयोजन को सही बताती रही और प्रदेश के तमाम बड़े नेता इस आयोजन में शामिल हुए. फ़िल्मी जगत की कई हस्तियों से लेकर योग गुरु बाबा रामदेव भी इस आयोजन का हिस्सा बने और इन तमाम देशी-विदेशी मेहमानों को औली लाने के लिए गुप्ता बंधुओं के हेलिकॉप्टर लगातार तैनात रहे. इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश के बाद इतना ज़रूर हुआ कि पहले जो हेलिकॉप्टर औली में ठीक विवाह स्थल के पास ही उतारे जा रहे थे अब उन्हें यहां से क़रीब दस किलोमीटर दूर रविग्राम में उतारा जाने लगा.

इस आयोजन को प्रदेश हित में बताते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने बयान दिया कि इससे स्थानीय युवाओं को रोज़गार मिलेगा और व्यापारियों को भी मुनाफ़ा होगा. लेकिन कई स्थानीय लोग मुख्यमंत्री की इस बात से इत्तेफ़ाक नहीं रखते. विवाहस्थल के पास ही बसे परसारी गांव के रहने वाले युवा अंकित पंवार कहते हैं, ‘इस आयोजन को करने वाले सभी लोग बाहर से आए थे. खाने-पीने का सारा सामान और खाना पकाने वाले भी बाहर के थे. कुछ स्थानीय लोगों को सामान ढ़ोने के लिए दिहाड़ी पर ज़रूर रखा गया लेकिन क्या उसे रोज़गार कहा जा सकता है. इससे बेहतर रोज़गार तो हम लोगों को सीज़न में वैसे भी मिल जाता है जब हम बतौर गाइड औली में काम करते हैं.’

औली में ही रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार हरीश चंदोला कहते हैं, ‘यहां ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ से पर्यटन को बढ़ावा देने की बात सिर्फ़ एक जुमला है. इतनी महंगी शादी कितने लोग कर सकते हैं? गुप्ता बंधु यहां इसलिए शादी के लिए आए हैं कि उनके पास अथाह पैसा है, उनके मेहमान हेलिकॉप्टरों से पहुंच रहे थे, करोड़ों के अस्थायी टेंट लगाए गए. इतना पैसा ख़र्च करने की हैसियत कितने लोगों में है? साल-दो साल में अगर ऐसा एक आयोजन यहां होता है तो उससे स्थानीय लोगों को क्या रोज़गार मिलेगा. जबकि दूसरी तरफ़ ऐसा एक ही आयोजन पर्यावरण को भारी नुक़सान पहुंचाता है.’

कुछ समय पहले ही उत्तराखंड हाई कोर्ट ने बुग्याल क्षेत्र में किसी भी तरह के निर्माण पर पाबंदी लगाने के साथ ही ऐसे इलाक़ों में रात को ठहरने पर भी रोक लगाने वाला एक अहम फ़ैसला दिया है. इस फ़ैसले के चलते प्रदेश में साहसिक पर्यटन से जुड़े सैकड़ों लोगों का रोज़गार प्रभावित हुआ. सामाजिक कार्यकर्ता अतुल सती कहते हैं, ‘प्रदेश सरकार तर्क दे रही है कि औली क्षेत्र में तो पहले से कुछ स्थायी निर्माण हैं लिहाज़ा यहां अस्थायी टेंट लगाकर ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. ये तर्क एक ग़लत की आड़ में दूसरे ग़लत को जायज़ ठहराने जैसा है. क्योंकि औली में क्लिफ़ टॉप नाम से जो रिज़ॉर्ट बना है उसके काफ़ी हिस्से को ध्वस्त करने के आदेश कोर्ट पहले ही कर चुका है. इसके अलावा गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा यहां निर्मित भवन भी विवादित है. लेकिन अब सरकार इन्हीं विवादित भवनों की आड़ में नए निर्माणों को सही ठहराने की कोशिश कर रही है.’

औली प्रदेश के उन बेहद चुनिंदा हिस्सों में शामिल है जहां शानदार प्राकृतिक ढलान होने के चलते सर्दियों में स्कीइंग के विश्वस्तरीय आयोजन किए जाते हैं. यह भी एक कारण है कि पर्यावरणविद ऐसे क्षेत्रों में ज़्यादा छेड़छाड़ किए जाने को घातक मान रहे हैं. स्थानीय लोग बताते हैं कि कुछ साल पहले औली में इस ढलान को विस्तृत करने के उद्देश्य से सरकार ने यहां की घास खोद डाली थी. सरकार का मूल उद्देश्य तो सफल नहीं रहा लेकिन उस वक्त यहां की प्राकृतिक घास बर्बाद हो गई थी जिसे वापस आने में कई साल लग गए. हालिया आयोजन के दौरान ही औली दर्जनों ट्रक दिन-रात दौड़ते रहे हैं. ऐसे में इस तरफ़ के आयोजन औली के प्राकृतिक स्वरूप को दोबारा नुक़सान पहुंचा रहे हैं.

अतुल सती बताते हैं, ‘बीते साल औली में दर्जनों गाय मरी थीं जिनके शव कई-कई दिनों तक यहीं पड़े रहे. बदबू के चलते पर्यटक यहां दो मिनट भी खड़े नहीं हो पा रहे थे. हम लोगों ने तब मुख्यमंत्री को कई पत्र लिखे थे लेकिन उनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगी. तब न तो मुख्यमंत्री महोदय को पर्यटन को हो रहे नुक़सान का ख़याल आया और न ही उन गायों का जिनके नाम पर उनकी पार्टी ख़ूब राजनीति करती है. लेकिन अब अचानक जब गुप्ता बंधु अपने बेटों की शादी के लिए यहां आए हैं तो मुख्यमंत्री साहब औली के पर्यटन के लिए चिंतित नज़र आ रहे हैं.’

22 जून की शाम जब पांच दिनों बाद यह समारोह समाप्त हुआ तो औली की ढलानों पर कई टन कूड़ा पीछे छूट गया है. स्विट्जरलैंड से आए करोड़ों के फूल अब मुरझाकर कूड़ा हो गए हैं. पांच सितारा स्टेज अपने पीछे उन गड्ढों को छोड़ गया है जिनमें उसकी नींव डाली गई थी. और अलग-अलग तमाम कामों में इस्तेमाल हुआ थर्मोकोल व प्लास्टिक तो हवा के साथ उड़कर पूरी वादी में इस क़दर छितर गया है कि उसे समेटना लगभग नामुमकिन है. हालांकि औपचारिकता निभाने के लिए नगर पालिका की एक टीम सफ़ाई के काम पर नज़र रख रही है और तीस जून तक कई लोग इस काम में जुटे रहने वाले हैं.

गुप्ता बंधुओं से जुड़ा एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि साउथ अफ़्रीका से उनकी विदाई एक शादी के चलते ही हुई थी. उनके परिवार में हुई एक शादी वहां भी ऐसी ही थी जिसमें तमाम बड़ी हस्तियों ने शिरकत की थी और वहां भी मेहमान हेलिकॉप्टर से ही पहुंचे थे. लेकिन वहां फ़ौज के हेलिपैड पर हेलिकॉप्टर को उतरवाना गुप्ता बंधुओं को भारी पड़ गया. क्योंकि इसी कारण उन पर सवाल उठने लगे और स्थानीय लोगों का उनके ख़िलाफ़ आक्रोश बढ़ने लगा. इस वजह से उनके ख़िलाफ़ जांच शुरू हुई और अंततः भ्रष्टाचार के इतने मामले खुलने लगे कि उनके क़रीबी राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा को इस्तीफ़ा देना पड़ा और गुप्ता भाइयों को दक्षिण अफ़्रीका छोड़ना पड़ा.

शायद यही कारण है कि इस बार गुप्ता बंधुओं ने ध्यान रखा कि स्थानीय लोगों का विरोध उन्हें झेलना न पड़े. इसलिए उन्होंने औली के आस-पास बसे गांवों के कई लोगों को भोजन के लिए बुलाया और कई स्थानीय महिलाओं को साड़ी और शगुन भेंट किए. यह भेंट स्वीकारने की स्थानीय लोगों में ऐसी होड़ मची कि गुप्ता बंधुओं को यह वितरण कार्यक्रम बीच में ही रोक देना पड़ा. इसका नतीजा उस वीडियो के रूप में सामने आया जिसका ज़िक्र इस रिपोर्ट की शुरुआत में किया गया है.