भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद से लगातार यह चर्चा चल रही थी कि अब पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलेगा. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर काम करने वाले जगत प्रकाश नड्डा को जब इस बार बतौर मंत्री शपथ नहीं दिलाई गई तो कयास लगने लगे कि उन्हें ही भाजपा अध्यक्ष बनाया जाएगा. लेकिन भाजपा ने पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाने की जगह कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का रास्ता निकाला और इस पद पर जेपी नड्डा को बैठा दिया गया.

जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करते वक्त यह कहा गया कि अगले साल जनवरी तक भाजपा के संगठनात्मक चुनाव पूरे हो जाएंगे और तब नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा. अधिकांश लोग यह मानकर चल रहे हैं कि कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर नियुक्त हुए जेपी नड्डा ही भाजपा के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे.

लेकिन क्या वास्तव में ऐसा होगा? भाजपा के नेताओं से अलग-अलग बात करने पर दूसरी ही कहानी समझ में आती है. इन नेताओं की बातों पर यकीन करें तो पता चलता है कि जेपी नड्डा भले ही कार्यकारी अध्यक्ष बनने में कामयाब हो गए हों, लेकिन उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की राह अभी आसान नहीं हुई है. इस बारे में भाजपा के एक नेता कहते हैं, ‘आम तौर पर पार्टी में यह धारणा बनी है कि मौजूदा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पार्टी महासचिव भूपेंद्र यादव को पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर ज्यादा उपयुक्त मानते हैं. लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कुछ बेहद प्रभावी पदाधिकारी भूपेंद्र यादव के पक्ष में नहीं हैं. ऐसे में अभी अमित शाह ने जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष बनवाकर एक तरह से जनवरी, 2020 तक का समय ले लिया है. उम्मीद है कि इस बीच वे कोशिश करेंगे कि भूपेंद्र यादव के नाम पर संघ में भी सहमति बन जाए.’

ऐसे में दो सवाल उठते हैं. पहला यह कि भूपेंद्र यादव के नाम पर आखिर संघ के कुछ नेताओं की असहमति क्यों हैं? वहीं दूसरा सवाल यह है कि आखिर राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर संघ की पसंद वाले चेहरे कौन हैं?

जहां तक सवाल भूपेंद्र यादव के नाम को लेकर संघ के अंदर असहमति का सवाल है तो इसके जवाब में भाजपा के एक नेता बताते हैं, ‘संघ के कुछ लोगों को यह लगता है कि भूपेंद्र यादव को अध्यक्ष बनाने से उनसे वरिष्ठ पार्टी नेताओं में असंतोष हो सकता है. उधर, कुछ लोगों को उनके व्यवहार को लेकर भी कुछ समस्याएं हैं. अमित शाह का बेहद करीबी होना भी भूपेंद्र यादव के पक्ष में नहीं जा रहा है.’

दूसरे सवाल के संदर्भ में वे कहते हैं, ‘संघ की कोशिश एक ऐसे नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की होगी जिसकी संघ की व्यवस्था में काम करने की पुरानी पृष्ठभूमि रही हो. साथ ही कोशिश यह भी होगी कि किसी ऐसे व्यक्ति को अध्यक्ष पद पर बैठाया जाए जिसकी नरेंद्र मोदी और अमित शाह से अलग भी अपनी एक पहचान हो. 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद राजनाथ सिंह की जगह पर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए अमित शाह ने स्वतंत्र तौर पर काफी परिश्रम किया और पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई. लेकिन उनकी स्वतंत्र पहचान पर नरेंद्र मोदी से उनकी नजदीकी वाली पहचान हावी रही.’

संघ की यह योजना कितनी कामयाब होगी यह तो अभी कहा नहीं जा सकता, लेकिन इतना तय है कि भूपेंद्र यादव के नाम पर संघ की ओर से समस्याएं हैं. तो क्या इसका मतलब यह निकाला जाए कि जेपी नड्डा अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगे? इसके जवाब में पार्टी के एक नेता कहते हैं, ‘यह संभव तो है, लेकिन अधिक संभावना इस बात की है कि राजस्थान के ओमप्रकाश माथुर राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएं. जेपी नड्डा को अभी कार्यकारी अध्यक्ष तो बनाया गया है, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए उन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का कितना साथ मिलेगा, यह कहना अभी मुश्किल है. ऐसे में ओमप्रकाश माथुर का नाम उभरकर सामने आ सकता है. नरेंद्र मोदी के विश्वस्त लोगों में उन्हें शुमार किया जाता है. जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उस वक्त ओमप्रकाश माथुर गुजरात में बतौर पार्टी प्रभारी उनके साथ काम करते थे.’

वे आगे कहते हैं, ‘जेपी नड्डा, भूपेंद्र यादव और ओमप्रकाश माथुर के अलावा कोई और चौथा नाम भी अध्यक्ष पद के लिए सामने आ सकता है. इनमें अगर संघ के साथ अनुकूलता को पैमाना मानें तो नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह और शिवराज सिंह चौहान के नाम भी लिए जा सकते हैं. संभवत: नितिन गडकरी अध्यक्ष बनने के लिए इच्छुक नहीं हैं. लेकिन अगर यह प्रस्ताव राजनाथ सिंह या शिवराज सिंह चौहान के पास पहुंचता है तो दोनों लोग इसके लिए तैयार हो सकते हैं. इनके अलावा भी कोई और नाम सामने आ सकता है.’

राजनाथ सिंह पिछली मोदी सरकार में गृह मंत्री थे. इस सरकार में गृह मंत्रालय अमित शाह को दे दिया गया. राजनाथ सिंह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी. मंत्रिमंडल के गठन के पहले इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि प्रधानमंत्री मोदी राजनाथ सिंह को लोकसभा स्पीकर बनाना चाहते हैं. लेकिन मंत्री पद की शपथ लेने के बाद उनका मंत्रालय बदले जाने को उनके समर्थकों ने राजनाथ सिंह का अपमान माना. ऐसे में अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव उनके सामने आता है कि भाजपा में उनके लिए समानांतर शक्ति केंद्र बनने का अवसर होगा और संभवत: वे इस प्रस्ताव को खारिज नहीं कर पाएं. लेकिन यह स्थिति मोदी-शाह की जोड़ी के लिए अनुकूल नहीं होगी.

यही स्थिति शिवराज सिंह चौहान को लेकर भी है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से हटने के बावजूद उनकी अपनी एक राष्ट्रीय पहचान है. ऐसे में अगर वे भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाते हैं तो वे भी पार्टी में एक समानांतर शक्ति केंद्र बनकर उभर सकते हैं. संघ के पसंदीदा नेताओं में शिवराज सिंह चौहान की गिनती लंबे समय से होती आई है. लेकिन उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर स्वीकार करने में अभी की भाजपा का शीर्ष नेतृत्व सहज नहीं रहेगा.

पार्टी नेताओं की इन बातों के आधार पर कुल मिलाकर यह समझ में आता है कि भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की राह में अभी बहुत रोड़े हैं.