असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) से एक लाख लोग और बाहर हो गए हैं. ये वे लोग हैं जिनके नाम बीते साल एनआरसी के अंतिम मसौदे में शामिल किए गए थे. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. एनआरसी के समन्वयक प्रतीक हजेला ने बताया, ‘नागरिकता (नागरिकों का पंजीयन और उन्हें राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करने संबंधी) नियम-2003 के अनुसार एक अतिरिक्त सूची जारी की गई है. इसमें 1,02,462 ऐसे नागरिकों के नाम शामिल किए गए हैं, जो एनआरसी से बाहर हो गए हैं. यानी इन्हें अब विदेशी नागरिक मान लिया गया है.’ इससे पहले बीते साल 30 जून को एनआरसी के अंतिम मसौदे से 40 लाख लोगों का नाम बाहर था.

बाजार में सभी सिक्के असली : आरबीआई

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अलग-अलग सिक्कों पर स्थिति साफ करने की कोशिश की है. अमर उजाला की खबर के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने सभी सिक्कों को वैध बताया है. साथ ही, उसने लोगों से अलग-अलग डिजाइन और आकार वाले इन सिक्कों को लेन-देन में इस्तेमाल करने की अपील की है. आरबीआई का कहना है कि समय-समय पर आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व की थीम पर कुछ सिक्के जारी किए जाते हैं. केंद्रीय बैंक ने कहा है कि देश में अभी 50 पैसे और एक, दो, पांच और दस रुपये के सिक्के प्रचलन में हैं. वहीं, आरबीआई ने बैंकों से भी कहा है कि वे सिक्के जमा कराने या बदलवाने आए किसी भी व्यक्ति को अपनी शाखा से वापस न लौटाएं.

जनहित याचिकाओं पर अब मुख्य न्यायाधीश के अलावा अन्य चार शीर्ष न्यायाधीश भी सुनवाई करेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिकाओं (पीआईएल) को सुनने की व्यवस्था में अहम बदलाव किया है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक अब शीर्ष पांच न्यायाधीश इसकी सुनवाई करेंगे. इससे पहले केवल मुख्य न्यायाधीश ही इन याचिकाओं पर सुनवाई करते थे. वहीं, चुनाव से संबंधित किसी याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के साथ जस्टिस बोबड़े की पीठ भी कर सकेगी. इन बदलावों को एक जुलाई से लागू किया गया है. पीआईएल के जरिए कोई भी व्यक्ति संविधान द्वारा दिए गए किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन होने पर अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है. वहीं, इसके तहत लोकहित से जुड़े कई मामले भी अदालत के सामने आते हैं.

भारत में पारंपरिक विवाह का चलन कम होने से वैवाहिक हिंसा में कमी : यूएन

भारत में पारंपरिक विवाह (अरेंज्ड मैरिज) का चलन कम हो रहा है. इसकी जगह अब लड़के-लड़की की पहल पर परिवार की रजामंदी से होने वाले विवाह (सेमी अरेंज्ड मैरिज) लेते जा रहे हैं. माना जाता है कि इससे वैवाहिक हिंसा में कमी आ रही है. हिन्दुस्तान ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की रिपोर्ट- ‘प्रोग्रेस ऑफ द वर्ल्ड वfमन 2019-20 : फेमिलीज इन द चेंजिंग वर्ल्ड’ के हवाले से इसकी जानकारी दी है. इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अरेंज्ड मैरिज अब भी सामान्य बना हुआ है और माता-पिता द्वारा तय पारंपरिक विवाह में महिलाओं के लिए अपना जीवनसाथी चुनने की भूमिका बेहद सीमित होती है. यूएन की इस रिपोर्ट की मानें तो सेमी अरेंज्ड शादियों में महिलाओं के पास अपने जीवन से संबंधित फैसलों पर बात रखने का तीन गुना अधिक मौका होता है.

काम का बोझ भारतीय महिलाओं को कमजोर और उनके बच्चों को कुपोषित कर रहा है

काम का बोझ भारतीय महिलाओं को शारीरिक रूप से कमजोर कर रहा है. साथ ही, उनके बच्चे भी कुपोषण का शिकार हो रहे हैं. दैनिक जागरण ने ब्रिटेन के ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय की शोध रिपोर्ट के हवाले से इस खबर को छापा है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि गांवों में महिलाएं घरेलू कामकाज के साथ ही खेतों में भी हाथ बंटाती हैं. इसके अलावा इन महिलाओं के लिए स्थिति तब और भी मुश्किल हो जाती है, जब उनके पति कमाने के लिए शहर चले जाते हैं. इससे घर की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं के कंधे पर ही आ जाती है. इसकी वजह से उन्हें खाने-पीने और आराम करने का वक्त नहीं मिलता. इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है. रिपोर्ट का कहना है कि इन हालात में जब वे मां बनती हैं तो उनके बच्चे औसत से कम वजन के पैदा होते हैं और बाद में कुपोषण के शिकार होते हैं.

बीएसएनएल का वित्तीय संकट गहराया, ठेके और खरीदारी के ऑर्डर देने पर रोक

सरकारी दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) में वित्तीय संकट गहराता जा रहा है. राजस्थान पत्रिका के मुताबिक दूरसंचार विभाग ने इस पर सभी तरह के ठेके और खरीदारी के ऑर्डर देने पर रोक लगा दी है. अब कंपनी के डिविजन प्रमुखों को इसके लिए पहले दिल्ली स्थित कॉरपोरेट कार्यालय से अनुमति लेनी होगी. इसके अलावा कंपनी ने सरकार को बताया है कि कर्मचारियों के वेतन के लिए जरूरी 850 करोड़ रुपये न होने की वजह से उसके लिए जून माह का वेतन दे पाना मुश्किल है. वहीं, वित्तीय संकट की स्थिति से निकलने के लिए बीएसएनएल ने सरकार से जमीनों को बेचकर नकदी जुटाने की मंजूरी मांगी है. हालांकि, सरकार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.