हमारे देश में लोगों के व्यवहार को अक्सर उनके परिजनों की परवरिश से जोड़ कर देखा जाता है. कहा जाता है कि बच्चे अपने माता-पिता के व्यवहार से ही सीखते हैं और उसी का अनुकरण करते हैं. बीते दो-तीन दिनों से सोशल मीडिया पर यह बात वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय के लिए कही जा रही है.

इसी हफ़्ते 26 जून को आकाश विजयवर्गीय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ. इसमें वे इंदौर नगर निगम के एक अधिकारी को बल्ले से पीटते दिखाई दिए. घटना वाली जगह पर नगर निगम के लोग एक जर्जर मकान गिराने पहुंचे थे. आकाश इंदौर-3 विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक हैं. उन्होंने निगम की इस कार्रवाई की विरोध किया. लेकिन विरोध करते-करते वे इतने उग्र हो गए कि बल्ला उठा कर एक अधिकारी के पैर पर दे मारा. विधायक की धौंस में उनके गुर्गे भी अधिकारियों पर टूट पड़े. मामला तब और बढ़ गया जब अपने इस कृत्य को लेकर सवाल किए जाने पर आकाश विजयवर्गीय ने कहा, ‘भाजपा में हमने यही सीखा है. पहले आवेदन, फिर निवेदन और फिर दे दनादन.’

उधर, मीडिया जब आकाश की इस हरकत पर उनके पिता कैलाश विजयवर्गीय के पास पहुंचा तो उन्होंने लाजवाब टिप्पणी की. एक टीवी चैनल के पत्रकार के सवाल पर कैलाश ने कहा, ‘आप जज हैं क्या? आप कौन हैं? आप फ़ैसला दे रहे हैं? चुपचाप पत्रकारिता करिये अपने चैनल में... फ़ैसला मत दीजिए. आपकी हैसियत क्या है? आप फ़ैसला करेंगे किसी विधायक के बारे में. अपनी औक़ात देखिए पहले.’

वहीं, तमाम आलोचनाओं के बीच अब कैलाश विजयवर्गीय की एक तस्वीर वायरल हो गई है. क़रीब 25 साल पुरानी इस तस्वीर में भाजपा नेता एक व्यक्ति को चप्पल दिखा रहे हैं. मध्य प्रदेश में कांग्रेस के नेता केके मिश्रा ने इस तस्वीर के बारे में बताया, ‘भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने अपने विधायक पुत्र आकाश का बचाव करते हुए कहा वह संस्कारवान है, उसने अच्छा ही किया होगा. अब मैं कहता हूं कि जो आप करते थे, वही बेटा कर रहा है. आप भी इंदौर के तत्कालीन एएसपी श्री प्रमोद फलणीकर पर जूते की बौछार कर चुके हैं. है न बेटा संस्कारवान!’