गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर की समस्या के लिए पंडित जवाहर लाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराया है. खबरों के मुताबिक शुक्रवार को लोकसभा में अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ‘सरदार पटेल ने जूनागढ़ और हैदराबाद जैसी कई रियासतों का देश में सफलतापूर्व विलय करवाया. वहीं जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी खुद पंडित नेहरू ने पास थी लेकिन उन्होंने इस समस्या को बढ़ा दिया.’ इसके साथ ही सवालिया लहजे में अमित शाह ने यह भी कहा, ‘आज जम्मू-कश्मीर का एक तिहाई हिस्सा भारत के साथ नहीं है. इसके लिए आखिर कौन जिम्मेदार है.’

अमित शाह ने आगे कहा, ‘देश की सेना जब जम्मू-कश्मीर में घुस आए कबाइलियों को खदेड़ रही थी तो उस दौरान पंडित नेहरू ने सीजफायर (युद्ध विराम) करा दिया था. इसकी वजह से कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के पास चला गया. यहां तक कि सीजफायर का वह फैसला उन्होंने गृह मंत्री को भरोसे में लिए बगैर किया था.’ इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘कांग्रेस के नेता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आज आरोप लगाते हैं कि हम लोगों को भरोसे में नहीं लेते.’

वहीं कांग्रेस के नेताओं ने अमित शाह के इन बयानों पर विरोध जताया और लोकसभा में खूब हंगामा किया जिसे शांत कराने के लिए सभापति को बीच-बचाव करना पड़ा. सरकार ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को छह महीने और बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था. उस पर भी कांग्रेस ने विरोध जताया था. कांग्रेस का कहना था कि भाजपा सत्ता का दुरुपयोग करते हुए वहां लोकतंत्र को खत्म कर रही है और वहां जबरन राष्ट्रपति शासन थोप रही है.

उधर, कांग्रेस के उन आरोपों को अमित शाह ने गलत बताया. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि देश में धारा 356 का इस्तेमाल करते हुए अब तक 132 बार राष्ट्रपति शासन लगा है. इसमें से 93 बार खुद कांग्रेस ने अपने राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पूरी करने के लिए इसका इस्तेमाल किया है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘भाजपा सरकार चाहती है कि जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक ढंग से निष्पक्ष चुनाव हों जिससे इस राज्य का विकास हो सके.’

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘इस क्रम में भाजपा सरकार वहां आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है. भारत विरोधी बातें करने वाले राज्य के जिन दो हजार लोगों को कांग्रेस ने सुरक्षा दी थी उनमें से सरकार ने 919 लोगों की सुरक्षा हटाने का काम किया है. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में प्रसारित होने वाले जिन पाकिस्तानी चैनलों पर भारत विरोधी कार्यक्रम दिखाए जाते थे उन्हें भी बंद करवा दिया गया है. यह पहल पूर्व गृह मंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साहसपूर्ण निर्णय करते हुए की थी जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं.’