क्रिकेट विश्व कप के मुकाबलों में ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका हमेशा से ऐसी टीमें रही हैं जिनके खिलाफ मैच का भारतीय दर्शकों को बेसब्री से इन्तजार रहता है. लेकिन इस बार के विश्व कप में इंग्लैंड का नाम भी इस सूची में जुड़ा है. एकदिवसीय क्रिकेट में अव्वल चल रही इंग्लैंड की टीम बीते तीन सालों से बेहतरीन फॉर्म में है और विश्व कप की सबसे बड़ी दावेदार बताई जा रही है. यही वजह है कि हर किसी को आज के महामुकाबले का बेसब्री से इन्तजार है. आइये इस मैच से पहले दोनों टीमों के हालातों पर एक नजर डालते हैं.

इंग्लैंड के लिए करो या मरो जैसे हालात

क्रिकेट विश्व कप 2019 से पहले ही यह कहा जा रहा था कि इंग्लैंड सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली टीम होगी. लेकिन अपने नौ लीग मैचों में से सात मैच खेलने के बाद भी यह टीम सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पायी है और इस पर टूर्नामेंट से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है. इंग्लैंड की कठिन परस्थितियों को इस बात से समझा जा सकता है कि उसे अब अपने जो दो बचे मैच हर हाल में जीतने हैं उनमें से एक भारत तो दूसरा न्यूजीलैंड के खिलाफ है.

इस विश्व कप में इंग्लैंड के बल्लेबाजी क्रम को सबसे मजबूत माना जा रहा था. न केवल पूर्व क्रिकेटर बल्कि भारतीय कप्तान विराट कोहली का भी कहना था कि इंग्लैंड इस विश्व कप में 500 रन तक बना सकती है. इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने इस विश्व कप में उम्मीदों के मुताबिक ही शुरुआत भी की और टीम टूर्नामेंट के पहले पांच मैचों में से चार जीतकर आठ पॉइंट्स के साथ टॉप पर थी.

लेकिन इसके बाद पहले श्रीलंका और फिर ऑस्ट्रेलिया से मैच गंवाने के बाद उसके हालात खराब हो गए. इन मैचों में इंग्लैंड के लिए चिंता की बात यह थी उसने ये दोनों मुकाबले केवल अपनी बल्लेबाजी की वजह से हारे. हैरानी की बात यह थी इंग्लैंड की बल्लेबाजी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 221 रनों पर तो श्रीलंका जैसी कमजोर टीम के खिलाफ महज 212 रनों पर सिमट गयी.

क्रिकेट के जानकार इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम की इस स्थिति के पीछे कई कारण बताते हैं. पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर एक साक्षात्कार में कहते हैं, ‘इंग्लैंड की जो मजबूती बताई जा रही थी, वही वजह आज उसकी कमजोरी साबित हो गयी है, और यह वजह है उनका अग्रेसिव (आक्रामक) रवैया.’

सुनील गावस्कर के मुताबिक हर मैच में कोई भी टीम एक जैसी रणनीति के साथ नहीं उतर सकती. उनका मानना है कि इंग्लैंड ने पिच और परस्थितियों को परखे और समझे बगैर हर मैच में आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखी और यही बात उनके खिलाफ गयी. ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ मैच में उसे जो पिच मिली उसे देखते हुए साफ़ था कि उस पर आक्रामक बल्लेबाजी नहीं की जा सकती. लेकिन इंग्लैंड ने आक्रामकता ही अपनाई. कई अन्य जानकार भी कहते हैं कि इंग्लैंड की आक्रामक रणनीति ने ही उसे ये मैच हरवा दिए.

वैसे देर से ही सही लेकिन इंग्लैंड के कप्तान और कोच को भी अब यह बात समझ में आ गयी है कि परस्थितियों के हिसाब से ही क्रिकेट खेलने में ही भलाई है. शनिवार को मैच की पूर्व संध्या पर जब पत्रकारों ने इंग्लिश कप्तान इयान मॉर्गन से पिछले दो मैचों में हार का कारण पूछा तो उनका कहना था, ‘मैं नहीं मानता कि हमारे खिलाड़ियों के मैच जीतने के प्रयासों में कोई कमी थी. हमारा मानना है कि हमने परिस्थितियों को समझने में गलती की.’

हालांकि, आज के मैच में परिस्थितियां इंग्लैंड के अनुकूल बताई जा रही हैं क्योंकि क्रिकेट के जानकारों के मुताबिक रविवार के मैच में एजबेस्टन की पिच बल्लेबाजी के लिए आसान होगी. हालांकि इस पर फिरकी गेंदबाजों को थोड़ी मदद भी मिल सकती है. हालांकि, ये दोनों ही बातें इंग्लैंड के ही नहीं भारत के हक में भी जाती हैं और इसीलिए आज जोरदार मुकाबले की उम्मीद की जा रही है.

भारतीय टीम के लिए बड़ी टीम के खिलाफ खुद को परखने का मौका

विश्व कप में इस समय इंग्लैंड से एकदम उलट भारत की स्थिति है. इस विश्व कप में भारतीय टीम अब तक अपना कोई भी मुकाबला नहीं हारी है. उसने ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम को भी शिकस्त दी है. उसने अब तक छह मुकाबले खेले हैं. इनमें से पांच उसने जीते और एक रद्द हो गया था. उसे सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए बचे हुए तीन लीग मैचों में से केवल एक मुकाबला ही जीतना है. यही वजह है कि आज का मैच भारतीय टीम के लिए एक बड़ी टीम के खिलाफ खुद को परखने के मौके जैसा है.

इस विश्व कप में भारत के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि चिंता का बड़ा कारण रहने वाले उसके गेंदबाज जबरदस्त फॉर्म में हैं. यहां तक उसने अब तक अधिकांश मैच भी गेंदबाजी की दम पर जीते हैं. टूर्नामेंट में किसी भी टीम के गेंदबाज शुरूआती ओवरों में वैसा प्रदर्शन नहीं कर सके हैं जैसा जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी ने किया है. अब तक किसी भी मैच में पॉवर प्ले के ओवरों में इन्होने 48 से ज्यादा रन नहीं दिए हैं. पहले दस ओवरों में भारतीय गेंदबाजों का इकॉनमी रेट सबसे कम (3.72 रन प्रति ओवर) रहा है, इसके बाद इंग्लैंड के गेंदबाज आते हैं जिनका इकॉनमी 4.88 है. शुरूआती ओवरों के बाद युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव गेंदबाजी की जिम्मेदारी काफी अच्छे से संभाल रहे हैं.

हालांकि, भारतीय टीम के लिए बल्लेबाजी में चिंतित होने का कारण है. पिछले कई मैचों में यह देखा गया है कि सलामी जोड़ी के न चलने पर भारत बड़े स्कोर नहीं खड़ा कर सका है. और इसका सबसे बड़ा कारण मध्यक्रम के बल्लेबाजों का न चलना है. बल्लेबाजी में चौथा क्रम अभी भी भारतीय टीम प्रबंधन की चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है. इस विश्व कप के दौरान भारतीय टीम में अब तक कोई भी बल्लेबाज चौथे क्रम पर संतोषजनक बल्लेबाजी नहीं कर सका है. पिछले तीन मैचों से विराट कोहली हरफनमौला विजय शंकर को चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करा रहे हैं लेकिन वे उम्मीदों पर बिलकुल भी खरे नहीं उतरे हैं.

हालांकि, कई पूर्व क्रिकेटरों ने भारतीय कप्तान को चौथे नंबर पर ऋषभ पंत या दिनेश कार्तिक को मौका देने की सलाह दी है. इनका कहना है कि जब विजय शंकर गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों में ही बेहतर नहीं कर रहे हैं तो दूसरों को मौका देना ज्यादा बेहतर होगा. अभी यह इसलिए भी अच्छा कदम होगा क्योंकि जिसे भी मौका मिलेगा वह सेमीफाइनल मुकाबलों से पहले ही तीन मैच खेल लेगा.

हालांकि, शनिवार को विराट कोहली ने यह संकेत दिए कि वे एक बार फिर चौथे क्रम पर विजय शंकर को ही मौका देंगे. पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘उनके बारे में सवाल उठना अजीब है क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ अच्छी बल्लेबाजी की थी. अफगानिस्तान के खिलाफ मुश्किल पिच पर वह आत्मविश्वास से भरा दिखा. पिछले मुकाबले में भी वे अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे लेकिन केमार रोच की शानदार गेंद पर आउट हो गये...आप ऐसे बैठ कर किसी पर निशाना नहीं साध सकते हैं, मुझे निजी तौर पर लगता है कि वे अच्छा कर रहे हैं.’