प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में पानी से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र करते हुए लोगों से स्वच्छता आंदोलन की तरह ‘जल संरक्षण’ आंदोलन चलाने की अपील की है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के पहले एपीसोड में रविवार को कहा, ‘मेरा पहला अनुरोध है, जैसे देशवासियों ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया, आइए, वैसे ही जल संरक्षण के लिए एक जन आंदोलन की शुरुआत करें.’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि देश में पानी के संरक्षण के लिए जो पारंपरिक तौर-तरीके सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं, लोग उन्हें साझा करें.

आजीविका चलाने के लिए आदिवासी अपने बच्चों को गिरवी रखने पर मजबूर

राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई जिलों में आदिवासी समुदाय के लोग अपने जीवनयापन के लिए बच्चों को गिरवी रखने के लिए मजबूर हैं. राजस्थान पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के बारां, बांसवाड़ा, डूंगरपुर और कुशलगढ़ में इस तरह के हालात सामने आए हैं. वहीं, मध्य प्रदेश के धार, झाबुआ और अलीराजपुर के आदिवासी भी अपनी आजीविका चलाने के लिए ऐसा करने पर मजबूर हैं. ये आदिवासी 30 से 40 हजार रुपये में अपने बच्चों को रैबारियों के पास गिरवी रख देते हैं. रैबारी इन्हें भेड़ और ऊंट चराने का काम देते हैं. इस बारे में एक आदिवासी का कहना है, ‘सरकारी योजनाओं का इन इलाकों में अधिक फायदा नहीं मिला है. बच्चों का पेट पालने के लिए ही उन्हें रैबारियों को सौंप देते हैं. इस बात का दुख हमें भी होता है.’ उधर, रैबारी इन बच्चों को अपने पास गिरवी इसलिए रखते हैं कि ये बच्चे खाते कम हैं और काम अधिक करते हैं. इसके अलावा कम खाने से रात में बच्चों को नींद भी नहीं आती है, जिससे इनके मवेशियों की रखवाली होती है.

बीते 100 वर्षों में जून पांचवां सबसे सूखा महीना

बीते महीने देश में बारिश सामान्य से 33 फीसदी कम हुई है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक इस तरह जून बीते 100 वर्षों के सबसे सूखे पांच महीनों में शामिल हो गया. इससे पहले साल 1923, 1926, 2009 और 2014 का जून सबसे सूखा रहा था. मौसम विभाग की मानें तो जून में 112.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. यह दीर्घावधि औसत 166.9 मिलीमीटर से काफी कम है. बताया जाता है कि पूरे देश में 36 में से 30 मेट्रोलॉजिकल सब-डिवीजन ऐसे रहे जिनमें बारिश में 20 से 60 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई. हालांकि, विभाग का कहना है कि जुलाई के पहले हफ्ते में अच्छी बारिश से लोगों को राहत मिल सकती है.

लखनऊ के इमामबाड़े में पर्यटकों के छोटे कपड़े पहनकर जाने पर रोक

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित इमामबाड़े में पर्यटक शॉर्ट्स यानी छोटे कपड़े पहनकर नहीं जा पाएंगे. नवभारत टाइम्स के मुताबिक जिला प्रशासन ने मुसलमान धर्मगुरुओं की सलाह पर यह फैसला लिया है. इस बारे में जिला अधिकारी कौशलराज शर्मा ने कहा, ‘छोटे और बड़े इमामबाड़े में लोगों के अशोभनीय कपड़े पहनकर आने की शिकायतें मिल रही थीं. ऐसे में तय किया गया कि इमामबाड़ों में पर्यटक गरिमामय वस्त्र पहनकर ही प्रवेश कर सकेंगे.’ उन्होंने आगे बताया कि इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सुरक्षाकर्मियों को दी जाएगी. साथ ही, यहां सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे. वहीं, इमामबाड़े में अब प्रोफेशनल फोटोग्राफी और शूटिंग पर भी रोक लगा दी गई है.

आदित्यनाथ ने मेरठ में लोगों के पलायन की खबरों को खारिज किया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने मेरठ के प्रह्लादनगर में लोगों के पलायन की खबरों को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि मेरठ में कोई पलायन नहीं हुआ है. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक रविवार को सहारनपुर में उन्होंने कहा, ‘वर्ष 2016 में कैराना और कांधला के हालात अलग थे. अब हम सत्ता में हैं इसलिए, पलायन नहीं हो सकता है.’ इससे पहले प्रह्लादनगर के कुछ घरों की दीवारों पर ‘मकान बिकाऊ है’ लिखा हुआ दिखा था. इसके बाद विपक्षी दलों ने इलाके से लोगों के पलायन करने का दावा किया था. आदित्यनाथ ने पुलिस अधिकारियों को अपराध दर को न्यूनतम स्तर पर लाने का आदेश दिया.

यूएई के प्रधानमंत्री की पत्नी 271 करोड़ रु लेकर फरार हुईं

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मखतूम की पत्नी हया बिंत अल हुसैन देश छोड़कर जर्मनी चली गईं. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक हया अपने साथ दोनों बच्चों और 271 करोड़ रुपये के साथ फरार हुई हैं. बताया जाता है कि उनके यूएई छोड़ने में एक जर्मन राजनयिक ने उनकी मदद की थी. जर्मनी पहुंचने के बाद हया ने राजनीतिक शरण की मांग की है और मखतूम से तलाक भी मांगा है. इससे पहले मखतूम की बेटी राजकुमारी लतीफा ने भी देश छोड़ने की कोशिश की थी. लेकिन, उन्हें भारतीय तय से दूर एक समुद्री नौका से पकड़ लिया गया था. लतीफा का कहना था कि वे अपने पिता के अत्याचार के चलते देश से भागने के लिए मजबूर हुई थीं. बताया जाता है कि उन्हें अभी नजरबंद रखा गया है.