केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नगालैंड में आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (अफस्पा) को और छह महीने तक के लिए बढ़ा दिया है. इस तरह अब वहां यह कानून इस साल के अंत तक लागू रहेगा. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सरकार ने इस फैसले के पीछे नगालैंड की ‘अस्थिरता’ और वहां की ‘खतरनाक अशांत परिस्थितियों’ को जिम्मेदार बताया है. इसके साथ ही सोमवार को गृह मंत्रालय ने इस बाबत एक अधिसूचना भी जारी की. इसमें वहां अफस्पा की अ​वधि बढ़ाए जाने वाले फैसले को 30 जून 2019 से प्रभावी माना जाने वाला भी कहा है.

नगालैंड से अफस्पा हटाने के लिए तीन अगस्त 2015 को वहां के एक विद्रोही संगठन एनएससीएन-आईएम और केंद्र सरकार के बीच समझौते के एक प्रारूप (फ्रेमवर्क एग्रीमेंट) पर सहमति बनी थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में उस समझौते पर इस विद्रोही संगठन के महासचिव थुइंगालेंग मुइवा जबकि केंद्र सरकार की तरफ से वार्ताकार आरएन रवि ने दस्तखत उस पर दस्तखत किए थे. लेकिन फिलहाल वहां इस कानून को हटाने की दिशा में सरकार बढ़ नहीं पाई है.

अफस्पा के जरिये सशस्त्र सुरक्षा बलों को कई विशेषाधिकार मिलते हैं. इसके तहत वह किसी भी जगह तलाशी अभियान चला सकते हैं. साथ ही बगैर किसी पूर्व अ​नुमति के उन्हें किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की छूट भी मिली है. सुरक्षा बलों के इन विशेषाधिकारों को देखते हुए उत्तर-पूर्व और जम्मू-कश्मीर के विभिन्न संगठनों की तरफ से इस कानून को वापस लिए जाने की मांग की जा चुकी है.

बताया जाता है कि पूर्वोत्तर में नगालैंड के अलावा असम और अरुणाचल प्रदेश के भी तीन जिलों में अफस्पा लागू है. इसके अलावा मणिपुर में इंफाल नगर निगम क्षेत्र को छोड़कर इस राज्य में भी इस कानून को लागू किया गया है.