सोमवार को राज्यसभा की मंजूरी के बाद जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को और छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है. इसके साथ ही संसद के उच्च सदन ने जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक - 2019 को भी पारित कर दिया है. इससे पहले सोमवार को ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में इन दोनों प्रस्तावों को रखा था. इस पर उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने सदस्यों को बहस के लिए पांच घंटे का समय दिया था.

वहीं चर्चा के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), समाजवादी पार्टी (सपा) और बीजू जनता दल (बीजेडी) ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन के विस्तार का समर्थन किया. इससे यह प्रस्ताव पारित हो गया. उधर, इस प्रस्ताव पर बहस के दौरान उठे सवालों के जवाब में अमित शाह ने कहा कि उनकी सरकार राष्ट्रपति शासन के जरिये इस राज्य में शासन नहीं करना चाहती और चुनाव आयोग ने सुरक्षा कारणों से वहां चुनाव करवाने का फैसला टाला है. गृहमंत्री के मुताबिक वहां इस साल के अंत तक चुनाव करवाए जाएंगे.

इसके साथ ही अमित शाह ने यह भी कहा, ‘पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि कश्मीर की समस्या का समाधान जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत से होना चाहिए. आज मैं दोहराता हूं कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पूर्व प्रधानमंत्री के बताए रास्ते पर काम कर रही है.’

जम्मू-कश्मीर में इसी महीने की दो तारीख को राष्ट्रपति शासन की अवधि खत्म हो रही थी. इससे पहले बीते शुक्रवार को शाह के प्रस्ताव पर ही लोकसभा ने वहां राष्ट्रपति शासन के साथ जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक को मंजूरी दी थी. इस विधेयक से जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा, वास्तविक नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के दस ​किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को भी शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिल सकेगा.