सोमवार को राज्यसभा की मंजूरी के बाद जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को और छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. इससे पहले सोमवार को ही गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में इन दोनों प्रस्तावों को रखा था. इस पर राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने सदस्यों को बहस के लिए पांच घंटे का समय दिया था. इस चर्चा के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), समाजवादी पार्टी (सपा) और बीजू जनता दल (बीजेडी) ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन के विस्तार का समर्थन किया. इससे यह प्रस्ताव पारित हो गया. वहीं, गृह मंत्री ने कहा है कि राज्य में इस साल के अंत तक चुनाव करवाए जाएंगे.

जनमत संग्रह नहीं हुआ तो अनुच्छेद-370 कैसे खत्म किया जा सकता है : फारूक अब्दुल्ला

फारूक अब्दुल्ला ने संसद में गृह मंत्री अमित शाह के जम्मू-कश्मीर को लेकर दिए गए बयान पर सख्त प्रतिक्रिया दी है. अमर उजाला के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘जब महाराजा हरि सिंह ने कश्मीर का भारत में विलय किया था तो यह जनमत संग्रह होने तक अस्थायी व्यवस्था थी. जनमत संग्रह के बाद जम्मू-कश्मीर की जनता को तय करना था कि वे भारत के साथ रहेंगे या पाकिस्तान के साथ. लेकिन, ऐसा नहीं हो सका तो अनुच्छेद-370 कैसे खत्म किया जा सकता है.’ वहीं, सूबे में राष्ट्रपति शासन की अवधि छह महीने के लिए बढ़ाने पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने कहा, ‘उनके पास (मोदी सरकार) इसके अलावा कोई विकल्प भी नहीं है. चुनाव आयोग यहां चुनाव कराने के लिए तैयार था लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर रोक लगा दी.’

जो भी हुआ, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है : नीतीश कुमार

मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार (एईएस) से 150 से अधिक बच्चों की मौत के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को इस पर अपनी चुप्पी तोड़ी है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक उन्होंने विधानसभा में कहा, ‘जो भी हुआ, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. इस पर केवल दु:ख व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है. यह काफी गंभीर मुद्दा है.’ नीतीश कुमार ने आगे कहा, ‘सरकार ने बचाव की पूरी कोशिश की है. इस पर विशेषज्ञों की एक पूरी टीम बनाई गई है, जिससे इसकी तह तक जाया जा सके.’ वहीं, सदन में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने कहा कि 28 जून तक इस बीमारी से पीड़ित 720 बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए. इनमें 586 स्वस्थ हो गए.

जीएसटी के राजस्व में सुधार होने पर 12 फीसदी और 18 फीसदी वाली दरों को मिलाकर एक किया जा सकता है : अरुण जेटली

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जीएसटी के राजस्व में सुधार होने पर 12 फीसदी और 18 फीसदी दरों को मिलाकर एक किया जा सकता है. हिन्दुस्तान में प्रकाशित खबर के मुताबिक उन्होंने कहा कि इसके बाद प्रभावी रूप में दो दरों वाली प्रणाली बन सकती है. अरुण जेटली ने सोमवार को जीएसटी लागू होने के दो साल पूरे होने पर एक फेसबुक पोस्ट में ये बातें कही हैं. उन्होंने इसमें लिखा है, ‘उपभोक्ताओं की जरूरत के ज्यादातर सामान अब 18 फीसदी, 12 फीसदी और पांच फीसदी कर के दायरे में हैं. केवल विलासिता और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह वस्तुओं पर ही 28 फीसदी कर है.’

ट्विटर पर मोहन भागवत सहित संघ के अन्य पदाधिकारी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत सहित अन्य शीर्ष पदाधिकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर आ गए हैं. हालांकि, दैनिक जागरण ने सूत्रों के हवाले से कहा कि ट्विटर पर आने के बावजूद संघ के पदाधिकारी इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे. सूत्रों की मानें तो इनका आधिकारिक ट्विटर हैंडल इसलिए बनाया गया है ताकि उनके फर्जी अकाउंटों के जरिए गलत सूचना फैलाने वालों को रोका जा सके. संघ के पदाधिकारियों का मानना है कि ट्विटर वह मंच नहीं है जहां संघ लोगों से संवाद करे. वहीं, आरएसएस के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले पहले से ट्विटर पर मौजूद हैं. इसके अलावा संघ का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट भी है. इसे करीब 13 लाख लोग फॉलो करते हैं.

सामान्य आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 16 जुलाई तक स्थगित

सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी सामान्य आरक्षण के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई 16 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी है. इन याचिकाओं में इस आरक्षण से संबंधित 103वें संवैधानिक संशोधन कानून-2019 को रद्द करने की मांग की गई है. जनसत्ता की खबर के मुताबिक न्यायाधीश एसए बोबडे और न्यायाधीश बीआर गवई की पीठ ने कहा कि इस मामले में विस्तार से सुनवाई की जरूरत है. इससे पहले शीर्ष अदालत ने सामान्य आरक्षण लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. हालांकि, इससे संबंधित कानूनी वैधानिकता पर विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया था. उसने केंद्र सरकार को इस बारे में नोटिस भी जारी किया था.