केंद्र सरकार निजी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन के मद्देनजर ऐसी कंपनियों को टैक्स समेत कई मामलों में बड़ी राहत दे सकती है जो एक निश्चित अवधि में पूंजी निवेश और नौकरियां सृजित करती हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार को लगता है कि निजी क्षेत्र के लिए निवेश बढ़ाने और रोजगार पैदा करने की जरूरत है. इसीलिए वह पूंजी निवेश को लेकर कंपनियों को टैक्स से राहत देने का एलान कर सकती है.

इंडियन एक्सप्रेस ने सरकार के एक सूत्र के हवाले से यह खबर प्रकाशित की है. सूत्र ने कहा कि आगामी बजट में निजी क्षेत्र की कंपनियों को टैक्स में राहत देने से पूंजी व्यय के साथ इंडस्ट्री में तेजी आएगी, जिससे मांग में बढ़ोतरी होगी. अखबार ने भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के हवाले से बताया कि निजी क्षेत्र पर सूचीबद्ध वाणिज्य बैंकों का बकाया कर्ज पिछले पांच सालों से 2.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल, 2014 में यह कर्ज 25.1 लाख करोड़ रुपये था, जो अप्रैल, 2019 तक 28.3 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, इसी अवधि में इस क्षेत्र पर इन बैंकों का कुल कर्ज 8.5 प्रतिशत बढ़ गया.

रिपोर्ट की मानें तो इन पांच सालों में सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्योगों पर बैंकों का बकाया कर्ज मामूली बढ़ोतरी के साथ 3.56 लाख करोड़ रुपये से 3.66 लाख करोड़ रुपये हो गया. खबर के मुताबिक इससे साफ पता चलता है कि इस पूरे क्षेत्र पर बकाया कर्ज के लिए बड़े उद्योग ज्यादा जिम्मेदार हैं, जिन्हें बैंकों ने अतिरिक्त कर्ज मुहैया कराए हैं. ऐसे में अर्थव्यवस्था और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े जानकार बताते हैं कि सरकार का निवेश बढ़ाना न सिर्फ इंडस्ट्री के लिए मददगार होगा, बल्कि इसके जरिये वह कॉर्पोरेट क्षेत्र में अपने प्रति विश्वास दोबारा पैदा कर सकती है जिसकी उसे इस समय जरूरत भी है.

बाजार के विशेषज्ञ भी इस राय से सहमत दिखते हैं. उनका कहना है कि देश में इस तरह की पहल की काफी जरूरत है. उनका मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था अपनी जनसंख्या के अनुरूप लाभ उठाने से चूक रही है. इस बारे में एक विशेषज्ञ ने कहा, ‘युवा आबादी के रूप में (अर्थव्यवस्था को) एक बड़ा उपभोक्ता बाजार मिलता है. लेकिन वह आबादी इन दिनों नौकरी ढूंढ रही है और वह उसे मिल नहीं रही.’