राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ दिया है. बुधवार को एक खुली चिट्ठी में उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जल्द ही अपनी कार्यसमिति की बैठक बुलानी चाहिए और नया मुखिया चुनना चाहिए. राहुल गांधी का यह भी कहना था कि वे इस प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे. इसके बाद कांग्रेस के नए अध्यक्ष के तौर पर अलग-अलग नामों की चर्चा चल रही है. इनमें कुछ नेताओं का नाम प्रमुखता से चल रहा है. इनमें राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, गुलाम नबी आजादी, एके एंटनी, कैप्टन अमरिंदर सिंह और केसी वेणुगोपाल शामिल हैं.

लेकिन एक ऐसा नाम भी हो सकता है जो सभी को हैरान कर दे. यह नाम है राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार का. पिछले कुछ समय से यह चर्चा चल रही है कि शरद पवार की पार्टी एनसीपी का विलय कांग्रेस में हो सकता है. शरद पवार की राजनीति कांग्रेस से ही शुरू हुई है. महाराष्ट्र की राजनीति में वे एक बेहद मजबूत नेता के तौर पर अपनी राजनीति के उसी दौर में उभरे जिस दौर में वे कांग्रेस के साथ थे.

लेकिन तकरीबन बीस साल पहले सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाने की वजह से शरद पवार को कांग्रेस से बाहर होना पड़ा. उस वक्त उनके साथ कांग्रेस से पीए संगमा और तारिक अनवर भी निकले थे. पीए संगमा अब इस दुनिया में नहीं हैं और तारिक अनवर वापस कांग्रेस में आ गए हैं. इस वजह से यह कयास बढ़ गए ​हैं कि अब शरद पवार भी कांग्रेस में अपनी पार्टी के साथ वापस आ सकते हैं.

लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद राहुल गांधी कुछ गिने-चुने नेताओं से ही मिले हैं. जिन नेताओं से राहुल गांधी इस दौरान मिले उनमें शरद पवार शामिल हैं. राहुल गांधी शरद पवार से मिलने उनके घर गए थे. एनसीपी के कांग्रेस में विलय की संभावना से इस मुलाकात को भी जोड़ा जा रहा है. इससे पहले भी लोकसभा चुनावों के लिए जब प्रचार अभियान जोरों पर था और जब एक बार राहुल गांधी महाराष्ट्र में चुनावी सभा करने गए तो उन्होंने शरद पवार के परिवार में उनकी अगली पीढ़ी के जो नेता हैं, उन लोगों से लंबी मुलाकात की. शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के अलावा अन्य लोगों से राहुल गांधी की लंबी मुलाकात से भी इन अटकलों को बल मिला कि एनसीपी में कांग्रेस के विलय की संभावनाओं पर राहुल गांधी सकारात्मक हैं.

साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि भले ही एनसीपी अलग पार्टी रही हो, लेकिन केंद्र और महाराष्ट्र की सरकार में वह हमेशा कांग्रेस के साथ ही रही है. कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दस साल के कार्यकाल में शरद पवार केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं. इसी तरह से महाराष्ट्र में भी कांग्रेस की नेतृत्व वाली सरकार में एनसीपी शामिल रही है.

वैचारिक स्तर पर दोनों दलों में समानता भी दिखती रही है. दोनों दल मोटे तौर पर एक ही विचारधारा वाले दल हैं. इस संदर्भ में यह कहा जा रहा है कि अब सोनिया गांधी के विदेशी मूल का होना कोई मुद्दा नहीं रहा, इसलिए दोनों दलों में अगर कोई वैचारिक दूरी नहीं है कि अभी की राजनीतिक परिस्थितियों को समझते हुए दोनों दलों को एक हो जाना चाहिए.

माना जा रहा है कि अगर दोनों पार्टियों के शीर्ष नेता सहमत हो जाएं तो विलय में कोई खास दिक्कत नहीं है. इसी आधार पर कहा जा रहा है कि अगर यह विलय होता है तो शरद पवार कांग्रेस अध्यक्ष बनने की दौड़ में बेहद प्रमुखता से शामिल हो जाएंगे क्योंकि वे अब भी पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हैं. उनकी राजनीतिक सूझबूझ का लोहा उनकी अपनी ही पार्टी और उनकी पुरानी पार्टी कांग्रेस के लोग ही नहीं मानते बल्कि दूसरे दलों के लोग भी उनकी सियासी सूझबूझ की तारीफ करते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अभी कांग्रेस की जो स्थिति है, उसमें शरद पवार की लिए काफी सियासी संभावनाएं हैं.

ऐसे में अगर एनसीपी का विलय कांग्रेस में होता है तो शरद पवार कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए स्वाभाविक तौर पर एक मजबूत दावेदार हो जाएंगे. अगर यह विलय होता है तो यह ऐसे समय में होगा जब कांग्रेस में नए अध्यक्ष की तलाश चल रही है. अगर यह विलय ऐसे समय में होता जब राहुल गांधी अध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए तैयार होते तो शरद पवार के लिए कांग्रेस अध्यक्ष पद तक पहुंचना असंभव जैसा होता. लेकिन अब जब राहुल गांधी खुद अध्यक्ष पद से हटने को तैयार हैं तो कांग्रेस के अंदर कि यह सियासी परिस्थिति शरद पवार के लिए अनुकूल मानी जा रही है. लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति करने का अनुभव उनके पास होने की वजह से कांग्रेस में भी उनके अध्यक्ष बनाने के प्रस्ताव को लेकर मौजूदा नेताओं की ओर से विरोधी की संभावना काफी कम है.

लेकिन ध्यान रखने की बात यह है कि शरद पवार और कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी की दूरी का घटना या खत्म हो जाना इस बात पर निर्भर करेगा कि एनसीपी का कांग्रेस में विलय हो पाता है या नहीं. कांग्रेस के कुछ प्रमुख नेताओं से जब इस बारे में सवाल किए गए तो उन लोगों ने दोनों पार्टियों के विलय के प्रस्ताव पर बातचीत होने से इनकार किया है. अभी तक तो जब भी शरद पवार से इस विलय के बारे में पूछा गया है तो उन्होंने हमेशा इसे खारिज किया है. वे कहते हैं कि दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई है.

हालांकि, राजनीतिक जानकार शरद पवार की इन बातों पर बहुत यकीन करने को तैयार नहीं हैं. उनका मानना है कि शरद पवार एक बेहद परिपक्व नेता हैं और अगर इस तरह की बातचीत दोनों दलों में चल भी रही होगी तब भी उन जैसा नेता औपचारिक तौर पर इसे स्वीकार नहीं करेगा. शरद पवार भी वही कर रहे हैं. उनकी ओर से विलय की चर्चा को खारिज किए जाने के बावजूद यह चर्चा खत्म नहीं हो रही है और जब इस संबंध में कांग्रेस नेताओं से बातचीत की जाए तो वे भी अनौपचारिक बातचीत में इसे पूरी तरह से खारिज नहीं कर रहे हैं.