केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बजट से एक दिन पहले गुरुवार को संसद में 2018-19 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष (2019-20) में आर्थिक वृद्धि दर सात फीसदी रह सकती है. वहीं, पिछले वित्तीय साल में यह 6.8 फीसदी रही थी. यह बीते पांच वर्षों में सबसे कम वृद्धि का आंकड़ा है. वहीं, साल 2018-19 में राजकोषीय घाटा 3.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है. यह आंकड़ा अंतरिम बजट के अनुमान के मुताबिक ही है.

तिब्बत मुद्दा अब राजनीतिक आजादी के लिए संघर्ष नहीं रहा : दलाई लामा

तिब्बतियों के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने एक बड़ा बयान दिया है. दैनिक जागरण के मुताबिक उन्होंने कहा है कि तिब्बत का मुद्दा अब राजनीतिक आजादी के लिए संघर्ष नहीं रह गया है. उन्होंने कहा, ‘राजनीतिक स्वतंत्रता मुख्य तौर पर लोगों की खुशी के लिए होती है लेकिन क्या वह अकेले खुशी की गारंटी हो सकती है?’ हालांकि, दलाई लामा ने तिब्बत की सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषायी पहचान के संरक्षण पर ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया. चीन की तिब्बत नीति को लेकर दलाई लामा का कहना था, ‘चीन में शीर्ष नेताओं में यह भावना बढ़ रही है कि उनकी नीतियां तिब्बत मुद्दे को पिछले 70 वषों में हल नहीं कर पाई हैं. उन्हें अधिक यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए.’ इस आध्यात्मिक नेता का आगे मानना था कि चीन गणराज्य और तिब्बत अपनी-अपनी पहचान को बरकरार रखते हुए सह अस्तित्व में रह सकते हैं.

नरेंद्र मोदी के सख्त रुख के बाद भी आकाश विजयवर्गीय को केवल नोटिस जारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सख्त रुख के बाद भी भाजपा की केंद्रीय अनुशासन समिति पार्टी विधायक आकाश विजयवर्गीय को केवल नोटिस जारी कर पाई है. राजस्थान पत्रिका की खबर के मुताबिक समिति ने इंदौर से पार्टी विधायक को इस नोटिस का जवाब देने के लिए 15 दिनों का वक्त दिया है. बताया जाता है कि यदि इस समय-सीमा के भीतर आकाश विजयवर्गीय जवाब नहीं देते हैं या फिर समिति उनकी सफाई से संतुष्ट नहीं होती है तो उन्हें पार्टी से निलंबित किया जा सकता है. वहीं, जेल से बाहर निकलने पर आकाश का सम्मान करने वालों के खिलाफ भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है. इससे पहले नरेंद्र मोदी ने पार्टी की संसदीय दल की बैठक में इस पार्टी विधायक के व्यवहार को गलत बताया था. बीती 26 जून को भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश ने अपने चुनाव क्षेत्र में नगर निगम के एक अधिकारी पर बल्ले से हमला कर दिया था.

उम्र सीमा में छूट का फायदा लेने वाले अंतिम परिणाम में सामान्य श्रेणी का दावा नहीं कर सकते

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि उम्र सीमा में छूट का फायदा लेने वाले परीक्षार्थी अंतिम परिणाम में सामान्य श्रेणी (अनारक्षित वर्ग) में शामिल किए जाने का दावा नहीं कर सकते. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा को अलग-अलग समझना पूरी तरह गलत है. वहीं, याचिकाकर्ता का कहना था कि दोनों परीक्षाएं अलग-अलग हैं और ऐसी स्थिति में मेरिट लिस्ट (अंतिम परिणाम) में अधिक अंक हासिल करने पर उसे सामान्य श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस दलील को नकार दिया. इस तरह उसने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है. हाई कोर्ट ने भी इस तरह का फायदा लेने वाले सफल उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी में शामिल करने से इनकार कर दिया था.

झारखंड : कालीमाटी में अभियान चलाकर वन क्षेत्र में तिगुने से अधिक बढ़ोतरी

झारखंड के आदिवासी बहुल गांव कालीमाटी में युवाओं की वजह से पिछले 33 वर्षों में वन क्षेत्र में तिगुने से अधिक बढ़ोतरी हुई है. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक साल 1986 में कुछ लोगों ने वन तस्करों से अपने जंगल को बचाने की ‘जंगल रक्षा’ मुहिम शुरू की थी. बताया जाता है कि इस अभियान में अब 90 परिवारों के 400 लोग जुड़ चुके हैं. ये पारंपरिक हथियार के साथ बारी-बारी से रोजाना जंगल की पहरेदारी करते हैं. वहीं, इस मुहिम के तहत पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले पर पांच हजार रूपया नुकसान पहुंचाने का भी प्रावधान है. उधर, बीते तीन दशकों में वन क्षेत्र 1,700 हेक्टेयर से 5,000 हेक्टेयर पहुंचने की वजह से कालीमाटी के जंगलों में जानवरों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है.

नाइट्रस ऑक्साइड दिल्ली समेत कई बड़े शहरों के लिए बड़ी समस्या : ग्रीनपीस

वायु प्रदूषक गैसों में शामिल नाइट्रस ऑक्साइड दिल्ली समेत कई बड़े शहरों के लिए बड़ी समस्या बन गया है. नवभारत टाइम्स ने पर्यावरण के मुद्दे पर काम करने वाली संस्था ग्रीनपीस की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि यह समस्या उन शहरों में अधिक है, जहां गाड़ियां या कल-कारखाने अधिक हैं. संस्था की रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली-एनसीआर के साथ मुंबई, बंगलुरू, कोलकाता, चेन्नई और हैदराबाद में नाइट्रस ऑक्साइड का खतरा सबसे अधिक है. वहीं, ग्रीनपीस इंडिया की वरिष्ठ पुजारिनी सेन का कहना है कि यह गैस इसलिए खतरनाक है कि यह पीएम 2.5 प्रदूषित कण बनने का सबसे बड़ा कारण है.