मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या मामले में दोषी करार दी गई और उम्रकैद की सजा काट रही नलिनी श्रीहरन की एक महीने की पैरोल मंजूर की है. खबरों के मुताबिक शुक्रवार को यह फैसला जस्टिस एमएम सुंदरेश और एम निर्मल कुमार की अदालत ने सुनाया. इसके साथ ही अदालत ने पैरोल पर जेल से बाहर रहने के दौरान नलिनी को मीडिया में कोई इंटरव्यू न देने के साथ किसी राजनीतिक व्यक्ति से मुलाकात नहीं करने की ताकीद भी दी.

इससे पहले नलिनी श्रीहरन ने अपनी बेटी की शादी का हवाला देते हुए मद्रास हाईकोर्ट से छह महीने के पैरोल की मांग की थी. अपनी याचिका में उसने कहा था कि वह और उसका पति 27 साल से जेल में बंद हैं. उनकी बेटा का जन्म जेल में ही हुआ था लेकिन उसका पालन-पोषण उसके रिश्तेदारों ने किया. ऐसे में उसे छह माह की पैरोल मिलनी चाहिए. लेकिन प्रदेश सरकार के वकील ने उसे इतनी अवधि का पैरोल दिए जाने पर विरोध जताया था जिसके बाद उसे 30 दिन जेल से बाहर रहने की अनुमति मिली है.

राजीव गांधी हत्याकांड के मामले में नलिनी श्रीहरन को दोषी मानते हुए अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई थी. लेकिन 24 अप्रैल 2000 को तमिलनाडु सरकार ने नलिनी की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था. एलटीटीई आतंकवादियों ने 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुंबुदूर में एक आत्मघाती हमले को अंजाम देते हुए राजीव गांधी की हत्या की थी.