भारत में क्रिकेट धर्म है और खिलाड़ी खु़दा का दर्ज़ा पाते हैं. एक पीढ़ी है जो 1983 के विश्व कप को हाथ में लिए कप्तान कपिल देव की तस्वीर देखते हुए जवान हुई है. उस पीढ़ी के पहले और बाद की पीढ़ियों के लिए आज भी यह खेल सबसे ऊपर है.

पर बीच में ऐसे भी दौर आये जब इन ‘ख़ुदाओं’ ने हमें शर्मसार किया. साल 2000 में क्रिकेट में सट्टेबाज़ी का खुलासा एक ऐसा ही वाक़या है. फ़िक्सिंग में लिप्त ऐसे लोगों के नाम उजागर हुए कि मानो गुलज़ार ने इन्हीं के लिए कहा था, ‘उसी का ईमां बदल गया है कभी जो मेरा ख़ुदा रहा था’. कपिल देव, मोहम्मद अजहरुद्दीन अजय शर्मा, मनोज प्रभाकर और अजय जडेजा जैसे दिग्गजों के फिक्सिंग में शामिल होने का इल्ज़ाम लगा.

मनोज प्रभाकर ने पहले खुलासा किया था

मनोज प्रभाकर एक बेहतरीन आलराउंडर थे. 1997 में आउटलुक मैगज़ीन में लिखे एक लेख में उन्होंने ज़िक्र किया कि टीम के एक सीनियर खिलाड़ी ने 1994 की श्रीलंका सीरीज़ के दौरान उन्हें एक मैच में ख़राब खेलने के बदले 25 लाख रुपये का ऑफर दिया था. काफ़ी हो-हल्ला मचा. हालांकि मनोज प्रभाकर ने तब उस सीनियर खिलाड़ी का नाम नहीं बताया और बात यहीं ख़त्म हो गई.

1999-2000 : दक्षिण अफ्रीकी टीम का भारत दौरा

इस दौरे में दोनों टीमों के बीच दो टेस्ट और पांच एक दिवसीय मैच खेले गए. अफ़्रीकी टीम के कप्तान हैंसी क्रोन्ये थे. भारत की टेस्ट टीम की अगुवाई महान सचिन तेंदुलकर ने की जबकि एक दिवसीय टीम के कप्तान सौरव गांगुली थे. दक्षिण अफ़्रीका ने टेस्ट सीरीज़ और भारत ने एक दिवसीय सीरीज़ में जीत हासिल की. महान क्रिकेटर कपिल देव उस वक़्त भारतीय टीम के कोच थे. सीरीज़ ख़त्म हुई और कुछ दिनों बाद धमाका हो गया.

दिल्ली पुलिस के हाथों एक रिकॉर्डिंग लगी

सात अप्रैल, 2000 को दिल्ली पुलिस के एक अफ़सर ने ख़ुलासा किया कि उसके हाथ एक रिकॉर्डिंग लगी है जिसमें दक्षिण अफ़्रीकी टीम के कप्तान हैंसी क्रोन्ये दिल्ली के एक सटोरिये संजय चावला से मैच हारने को लेकर सौदेबाज़ी की बात कर रहे हैं. दिल्ली पुलिस ने बताया कि क्रोन्ये के अलावा उस टीम के तीन और लोग भी चावला से संपर्क में थे. उनमें हर्शल गिब्ब्स दूसरा बड़ा नाम था.

जाहिर था कि दक्षिण अफ़्रीकी क्रिकेट बोर्ड में हलचल मच गई. उसने तुरंत ही ऐसी किसी फ़िक्सिंग की संभावना से इंकार कर दिया. लेकिन इस घटना के दो दिन बाद ही हैंसी क्रोन्ये ने क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अली बाकर के समक्ष यह क़बूल किया कि उन्होंने भारत के एक सट्टेबाज़ से मैच हारने के बदले पैसे लिए थे. क्रोन्ये की सचबयानी से तूफ़ान उठ गया. कप्तानी तो गई ही, उन्हें टीम से भी निकाल दिया गया.

सीबीआई की एंट्री

बात यहीं नहीं रुकी. उसी महीने भारत सरकार सीबीआई को मामले की छानबीन करके मालूम करने को कहा कि कोई भारतीय खिलाड़ी तो सट्टेबाजी में शामिल नहीं है. तभी निर्वासित जीवन जी रहे मनोज प्रभाकर ने हल्ला मचाया कि उन्होंने पहले ही कहा था पर तब किसी ने उनकी बात नहीं मानी. उनका कहना था कि वे जल्द ही सीबीआई के सामने पेश होकर उस व्यक्ति का नाम उजागर करेंगे जिसने उन्हें श्रीलंका के ख़िलाफ़ ख़राब मैच खेलने के लिए 25 लाख की पेशकश की थी.

इसके पहले वे कुछ बताते, बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष इंदरजीत सिंह बिंद्रा ने अमेरिका के सीएनएन चैनल पर धमाका कर दिया. यह कहकर कि जिस खिलाड़ी ने मनोज प्रभाकर को मैच हारने के लिए पैसों की पेशकश की थी वह कोई और नहीं भारतीय टीम का ‘माइकल जॉर्डन’ है. जब पूछा गया कौन, तो उन्होंने कपिल देव का नाम लिया.

उधर, मनोज प्रभाकर ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘ये बात मैं जानता हूं, मेरा भगवान जानता है और वो शख्स जानता है जिसने मुझे पेशकश की थी.’ जब पत्रकार ने कहा कि नाम बताइए तो मनोज प्रभाकर ने कहा ‘कपिल देव’. वे यहीं नहीं रुके. उनका कहना था कि सचिन तेंदुलकर और संजय मांजरेकर भी यह बात जानते हैं. पर जब इन दोनों खिलाड़ियों से पूछा गया तो उन्होंने ऐसी किसी भी जानकारी से इंकार कर दिया.

कपिल देव : कहीं ग़ुस्सा फूटा और कहीं रो पड़े

कपिल देव का नाम आते ही दुनिया भर में हंगामा खड़ा हो गया. उन्होंने तुरंत प्रेस कांफ्रेंस करके इलज़ामों को झूठा बताया. जब एक पत्रकार ने कहा कि मनोज प्रभाकर का यह कहना है कि अब कपिल उनके सामने आने से कतराते हैं तो वे झल्लाकर बोले, ‘मैं उसके कान के नीचे एक धर दूंगा’.

कपिल देव की दलील थी कि कैसे कोई तीसरे व्यक्ति की बात पर यकीन कर सकता है. उनका कहना था कि उन्होंने अपना जीवन क्रिकेट को दिया है और वे ऐसा सोच भी नहीं सकते. उसी शाम चर्चित पत्रकार करण थापर के टेलीविज़न शो पर कपिल फफक कर रो दिए और ख़ुद को बेगुनाह बताते रहे. देश और दुनिया को यकीन नहीं हो रहा था कि आखिर किसका यकीन करें और किसको ग़लत मानें.

तहलका का स्टिंग ऑपरेशन

चर्चित पत्रिका तहलका ने मनोज प्रभाकर की मदद से इस मामले पर एक स्टिंग ऑपरेशन किया. इसमें मनोज प्रभाकर ने कई दिग्गज खिलाड़ियों से कपिल की भूमिका के बारे में पूछा. सुनील गावस्कर और नवजोत सिंह सिद्धू जैसे क्रिकेटरों की बातों को छिपकर रिकॉर्ड किया गया, पर किसी ने भी मुकम्मल तौर पर कपिल के फ़िक्सिंग में शामिल होने की बात नहीं कबुली.

दक्षिण अफ़्रीका में हैंसी क्रोन्ये के ख़िलाफ़ जांच

दक्षिण अफ़्रीका में किंग्स कमीशन के सामने हैंसी क्रोन्ये, हर्शल गिब्स, निकी बोये और कुछ खिलाड़ी पेश हुए. क्रोन्ये ने क़ुबूल किया कि उन्होंने गिब्स और कुछ खिलाड़ियों को ख़राब खेलने को कहा. वहीं, अफ़्रीकी खिलाड़ियों ने भी स्वीकारा कि क्रोन्ये ने उन्हें ‘ऑफर’ दिए थे. क्रोन्ये ने यह भी कहा कि अजहरुद्दीन भारत की तरफ़ से मैच फ़िक्सिंग करवाते थे. उन्होंने सारे इल्ज़ाम स्वीकार कर लिए और उन पर ताज़िंदगी बैन लग गया. गिब्स और अन्य खिलाड़ियों पर कुछ महीने के लिए पाबंदी लगायी गई.

सीबीआई के छापे

हैंसी क्रोन्ये के ख़ुलासे के बाद सीबीआई ने दिल्ल्ली के सटोरिये मुकेश गुप्ता को पकड़ा. उसने दावा किया कि अजहरुद्दीन के अलावा अजय जडेजा, अजय शर्मा, वेस्ट इंडीज़ के ब्रायन लारा और श्रीलंका के अर्जुन रणतुंगा सट्टेबाज़ी में शामिल थे. सीबीआई ने कई अधिकारियों से भी पूछताछ की. कुछ महीने बाद एजेंसी ने कई क्रिकेट खिलाड़ियों और बोर्ड अधिकारियों के यहां छापे मारे. कपिल देव के घर पर भी यह कार्रवाई हुई थी.

कुछ महीनों बाद सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी. इसमें उसने कपिल देव के ख़िलाफ़ कोई सबूत न होने की बात कही. जांच एजेंसी ने मोहम्मद अजहरुद्दीन को फ़िक्सिंग का दोषी पाया. उसने अजय जडेजा, अजय शर्मा और मनोज प्रभाकर के सट्टेबाज़ों के साथ रिश्ते साबित होने की बात भी कही.

अजहरुद्दीन और अजय शर्मा पर आजीवन प्रतिबंध लगा और मनोज शर्मा और अजय जडेजा पर पांच साल के लिए. कपिल देव ने ख़ुद ही क्रिकेट कोच के पद से इस्तीफ़ा दे दिया. एक हवाई हादसे में हैंसी क्रोन्ये की मृत्य हो गई. हर्शल गिब्स पर से बैन हट गया. आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने अज़हर पर से बैन हटा दिया और वे कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए. बाद में अजय जडेजा और मनोज प्रभाकर से भी बैन हट गया.

अजय जडेजा आजकल कमेंटेटर हैं. प्रभाकर भी यदा-कदा टीवी पर नजर आ जाते हैं. अजय शर्मा का कुछ पता नहीं. पर न जाने क्यों कपिल देव ने निर्दोष साबित होने के बाद भी भारतीय क्रिकेट टीम के कोच पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

आज भी बीच-बीच में क्रिकेट में सट्टेबाज़ी की बात उठती रहती है. पर बमुश्किल किसी बड़े खिलाड़ी को किसी तरह की सज़ा हुई है. बस छोटी-मोटी मछलियों का शिकार होता है. इन दिनों विश्व कप चल रहा है और इत्तेफ़ाक से 1983 में भारतीय टीम के इस खिताब को जीतने पर एक फ़िल्म बन रही है जिसमें कपिल का किरदार रणवीर सिंह निभा रहे हैं. हाल ही में सुनील गावस्कर ने एक इंटरव्यू में कपिल देव को देश का सबसे महान क्रिकेट खिलाड़ी बताया है.