चर्चित अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने कहा है कि ‘जय श्रीराम’ का नारा कोलकाता की संस्कृति का हिस्सा नहीं है. खबरों के मुताबिक उन्होंने यह बात पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान कही. इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा, ‘मैं समझता हूं कि आज इस नारे का इस्तेमाल लोगों को पीटने के बहाने के तौर पर किया जा रहा है.’ अमर्त्य सेन ने आगे कहा, ‘समाज में जाति, धर्म और समुदाय के नाम पर पक्षपात बढ़ रहा है लेकिन हम ऐसा नहीं चाहते.’

इसके साथ ही अमर्त्य सेन ने यह भी कहा, ‘आजकल जब मैं कुछ लोगों को यह कहते हुए सुनता हूं कि उन्हें घर से निकलने में डर लगता है तो उस वक्त मैं खुद को इस शहर से अनजान पाता हूं. हमें ऐसी समस्यों पर चर्चा करनी चाहिए. एक शहर के रूप में कोलकाता पर मैं आज भी गर्व करता हूं.’

वहीं उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल की इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने पलटवार किया है. उनका कहना है, ‘अमर्त्य सेन को बंगाली और भारतीय संस्कृति के बारे में कोई जानकारी नहीं है. पश्चिम बंगाल के गांवों में जय श्रीराम का उद्घोष पहले से ही होता रहा है और अब पूरा राज्य इस नारे को बोल रहा है.’ इसके साथ ही दिलीप घोष ने यह भी कहा कि ‘जय श्रीराम’ पर अमर्त्य सेन जैसे लोगों के विचारों की पश्चिम बंगाल के लोगों को कोई जरूरत नहीं है.