कर्नाटक की कुमारस्वामी सरकार पर संकट की स्थिति बरकरार है. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन से बगावत कर इस्तीफा देने वाले 13 विधायक अपना फैसला बदलने के लिए तैयार नहीं हैं. बताया जाता है कि रविवार देर रात तक इन्हें मनाने की कोशिश की जाती रही लेकिन, इसका कोई नतीजा नहीं निकला. बागी विधायकों में से एक सोमशेखर का कहना है, ‘हम न इस्तीफा वापस लेंगे और न ही कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल होंगे.’ साथ ही, उन्होंने साफ किया है कि बागी विधायकों ने मुख्यमंत्री बदलने की मांग नहीं की है.

वहीं, कांग्रेस ने इस घटना के पीछे भाजपा का हाथ बताया है. पार्टी नेता सिद्धारमैया ने कहा, ‘वह (भाजपा) जनता की सरकार को बेदखल करना चाहती है. यह ऑपरेशन कमल है लेकिन सरकार को कोई खतरा नहीं है.’ वहीं, भाजपा ने कांग्रेस के इस आरोप को खारिज किया है. पार्टी नेता जी किशन रेड्डी का कहना है, ‘विधायकों के इस्तीफे से हमारा कोई लेना-देना नहीं है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कांग्रेस और जेडीएस विधायकों का अपने नेतृत्व में भरोसा नहीं है.’ उधर, भाजपा राज्य इकाई के प्रमुख बीएस येद्दियुरप्पा ने कहा है कि उनकी पार्टी संन्यासी नहीं है जो सरकार बनाने की संभावना से इनकार कर दे. इन तमाम खबरों को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है.

दिल्ली : हिंदू राव अस्पताल में डॉक्टर साबुन और दस्ताने के लिए भी मरीज पर निर्भर

इस साल (2019-20) के बजट में ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ के दावे के बीच देश की राजधानी दिल्ली में ही सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों को बुनियादी साधनों की कमी से जूझना पड़ रहा है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा संचालित हिंदू राव अस्पताल में स्थिति यह है कि डॉक्टरों को मरीज के परिजनों से साबुन और दस्ताने मंगाने पड़ रहे हैं. बताया जाता है कि रेजिडेंट डॉक्टरों के एसोसिएशन ने इस बारे में प्रशासन को लिखा है. इस अस्पताल के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर राहुल चौधरी ने बताया, ‘मेरा मरीज ऑपरेशन थियेटर में था और उसके रिश्तेदारों को साबुन और इंजेक्शन खरीदने के लिए कहना पड़ा. इसकी कीमत 10 रुपये थी. ऑपरेशन थियेटर और आईसीयू में हाथ धोने के लिए साबुन भी नहीं है.’ बताया जाता है कि इस अस्पताल के लिए जितना बजट आवंटित किया जाता है, उसका 85 फीसदी हिस्सा वेतन देने में खर्च हो जाता है. बाकी 15 फीसदी हिस्से से अन्य जरूरतों को पूरा किया जाता है.

देश में 11 साल के स्कूली बच्चे भी मानसिक तनाव के शिकार : रिपोर्ट

देश में 11 साल के बच्चे भी मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं. नवभारत टाइम्स ने संसद में पेश एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि 11 से 17 साल की उम्र वाले स्कूली बच्चे उच्च तनाव की स्थिति से जूझ रहे हैं. इसके चलते गांवों के 6.9 फीसदी और शहरों में 13.5 फीसदी बच्चों में मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी देखने को मिली हैं. वहीं, इस रिपोर्ट को संसद में पेश करने के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कहा है कि बच्चों को मानसिक तनाव से दूर रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं. उसके मुताबिक इसके लिए स्कूल में काउंसलिंग की व्यवस्था की जाएगी और शिक्षकों को भी इसके लिए प्रशिक्षित किया जाएगा. वहीं, स्कूलों से कहा गया है कि किसी भी बच्चे को हीन भावना से ग्रसित करने की कोशिश अपराध मानी जाएगी.

दिल्ली-एनसीआर में ओजोन प्रदूषण में बढ़ोतरी

दिल्ली-एनसीआर की हवा सर्दी के मौसम के अलावा अब अन्य दिनों में भी जहरीली होती जा रही है. हिन्दुस्तान ने विज्ञान और पर्यावरण केंद्र की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि बीते साल भर में ओजोन प्रदूषण में बढ़ोतरी दर्ज की गई है और इसकी चपेट में केवल औद्योगिक ही नहीं बल्कि, आवासीय इलाके भी आ रहे हैं. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2018 में ओजोन की मात्रा 106 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर थी जबकि इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 122 हो गया. बताया जाता है कि हवा में नाइट्रोजन ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जब तेज धूप के साथ प्रतिक्रिया करते हैं तो ओजोन प्रदूषक कणों का निर्माण होता है. इसके अलावा कल-कारखाने से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य गैसों की वजह से भी ये कण बनते हैं.

गुजरात : गोवंश हत्या के एक मामले में दोषी को 10 साल की सजा

गुजरात के राजकोट में गोवंश हत्या के एक मामले में निचली अदालत ने दोषी को 10 साल की सजा दी है. अदालत ने उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक निचली अदालत ने आरोपित सलीम मकरानी को गुजरात पशु संरक्षण (संशोधन कानून)-2017 के तहत दोषी ठहराया. बताया जाता है कि देश में गोवंश हत्या के लिए पहली बार किसी दोषी को इतनी बड़ी सजा दी गई है. इससे पहले जनवरी, 2017 में शिकायतकर्ता ने मकरानी पर आरोप लगाया था कि उसने उसकी गाय का बछड़ा चुराने के बाद इसे काटकर अपनी बेटी की शादी के भोज में परोस दिया था.

नेपाल : दलाई लामा के जन्मदिन से संबंधित आयोजनों को मंजूरी नहीं

नेपाल ने बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा के जन्मदिन से संबंधित आयोजनों को मंजूरी नहीं दी है. दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक इसके पीछे की वजह चीन का दबाव माना जा रहा है. हालांकि, राजधानी काठमांडू के सहायक मुख्य जिला अधिकारी कृष्ण बहादुर कातूवाल ने कहा है, ‘शांति और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रमों के आयोजनों की अनुमति नहीं दी जा रही है. अभी तक कुछ नहीं हुआ है, लेकिन हम अप्रत्याशित घटनाओं को लेकर सतर्क हैं. इस दौरान कोई व्यक्ति आत्मदाह जैसा कदम भी उठा सकता है.’ वहीं, नेपाल के तिब्बती रिहायशी क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. नेपाल में करीब 20 हजार निर्वासित तिब्बती रहते हैं.