सरकार सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए टायरों के निर्माण में रबड़ के साथ सिलिकॉन मिलाने और टायरों में नाइट्रोजन भरने को अनिवार्य बनाने पर विचार कर रही है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बढ़ते सड़क हादसों पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है. इसके साथ ही नितिन गडकरी ने कहा है, ‘सड़क सुरक्षा के बारे में यह बात ध्यान में आई है कि हमारे यहां टायरों के निर्माण मानकों और अंतरराष्ट्रीय मानकों में क्या समानता या फर्क है, उसकी हमारे पास अभी तक जानकारी नहीं थी.’

नितिन गडकरी के मुताबिक अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों में टायर के निर्माण में रबड़ के साथ सिलिकॉन डाला जाता है. इससे अधिक गति पर टायर का तापमान बढ़ने से इसके फटने की शिकायतें कम हो सकती है. साथ ही टायरों में नाइट्रोजन भरना चाहिए इससे टायर ठंडा रहता है. इन दोनों बातों को अनिवार्य बनाने पर केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है.

पीटीआई के मुताबिक सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने सड़क सुरक्षा से जुड़े एक सवाल के जवाब में यह भी बताया कि सड़क दुर्घटनाओं के लिए लापरवाही और तकनीकी पहलुओं की समीक्षा के आधार पर इसके कारणों पर काबू पाने के लिये 14 हजार करोड़ रुपये की एक योजना बनाई गई है. इसका मकसद राजमार्गों पर हादसे वाले स्थानों (ब्लैक स्पॉट) को चिह्नित कर दुर्घटनाओं के कारणों को निष्प्रभावी बनाना है. गडकरी ने कहा है कि इस योजना के तहत अत्याधुनिक तकनीक की मदद ली जाएगी. उन्होंने आगे कहा, ‘अभी नई तकनीक आई है जिसमें अगर वाहन चालक ने शराब पी रखी है तो वाहन का इंजन स्टार्ट ही नहीं होगा. अगर चालक ने सीट बेल्ट नहीं पहनी होगी तो पुलिस के नियंत्रण कक्ष में वाहन नंबर के साथ अन्य जानकारी पहुंच जाएगी. इस तरह के अन्य उपायों को हम लागू करेंगे.’

केंद्रीय मंत्री ने सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए तमिलनाडु में किए गए कारगर उपायों का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में यहां 29 प्रतिशत की कमी आई है. वहीं उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 15 प्रतिशत हादसे बढ़े हैं. इन बातों के मद्देनजर सरकार तमिलनाडु मॉडल पूरे देश में लागू करने पर विचार कर रही है. उन्होंने प्रभावी कानून के अभाव को भी समस्या की वजह बताते हुए कहा, ‘देश में 30 प्रतिशत ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी हैं और हम कुछ नहीं कर पाते. इसलिए मेरा सदन से अनुरोध है कि वह एक साल से लंबित पड़े सड़क सुरक्षा विधेयक को पारित करने में सरकार की मदद करे.

हादसे रोकने में गति नियंत्रण के सुझाव पर गडकरी ने कहा कि वाहनों खासकर बस-ट्रक जैसे भारी वाहनों की गति कम करने के बजाय सुरक्षा उपायों पर जोर देना उपयुक्त होगा. वाहन चालकों के अकुशल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि देश में व्यावसायिक वाहनों के 25 लाख वाहन चालकों की कमी है. इसके लिए देश में लगभग 850 ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना है.