ईरान का यूरेनियम संवर्धन स्तर सोमवार को 4.5 फीसदी के पार पहुंच गया. यह 2015 में हुए परमाणु करार में तय की गई सीमा से ज्यादा है. ईरानी परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रवक्ता बहरोज कमालवंदी ने मीडिया को यह जानकारी दी है.

ईरान की अर्धसरकारी समाचार एजेंसी आईएसएनए के मुताबिक सोमवार को कमालवंदी ने कहा, ‘आज सुबह ईरान ने यूरेनियम संवर्धन के 4.5 फीसदी के स्तर को पार कर लिया...इस स्तर की शुद्धता देश के ऊर्जा संयंत्रों की ईंधन जरूरतों को पूरी तरह संतुष्ट करती है.’

इससे पहले ईरान ने रविवार को कहा था कि वह 2015 में हुए परमाणु समझौते में तय की गई 3.67 फीसदी की संवर्धन सीमा का अब पालन नहीं करेगा. उसका यह भी कहना था कि अगर इस परमाणु समझौते के अन्य सदस्य देश उसकी मदद में आगे नहीं आते, तो वह भविष्य में यूरेनियम संवर्धन के इस स्तर को और बढ़ाएगा.

उधर, ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ ने ईरान के इस कदम पर गहरी चिंत जाहिर की है. यूरोपीय संघ की प्रवक्ता माजा कोसीजैनसिस ने संवाददाताओं से कहा, ‘हम ईरान से ऐसी सभी गतिविधियों को तत्काल रोकने का अनुरोध करते हैं जो 2015 परमाणु समझौते के तहत की गई प्रतिबद्धताओं से अलग हैं.’ उन्होंने कहा, ‘यूरेनियम संवर्धन को लेकर हम ईरान की घोषणा से बेहद चिंतित हैं.’

इस बीच मास्को से मिली खबरों के मुताबिक रूस ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम के बढे स्तर को लेकर चिंता व्यक्त की है. रूस के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने सोमवार को कहा कि करार को बचाने के लिये उनका देश कूटनीतिक दबाव डालेगा. पेस्कोव ने पत्रकारों से कहा, ‘यह स्थिति स्वाभाविक रूप से चिंताजनक है. लेकिन यह अमेरिका द्वारा करार से हटने के परिणामों में से एक है. अब रूस का लक्ष्य कूटनीतिक मोर्चे पर बातचीत और प्रयास जारी रखना है. हम 2015 परमाणु करार के समर्थक हैं.’

2015 में ईरान और छह अन्य विश्व शक्तियों के बीच हुए करार से मई 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अलग हो गए थे. इसके बाद अमेरिका ने ईरान के महत्वपूर्ण तेल और वित्तीय उद्योगों समेत कई क्षेत्रों पर फिर से प्रतिबंध लगा दिए अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद से ही उसके और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है.