कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह ने कहा है कि राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी भ्रम और भटकाव के दौर से गुजर रही है. इसके साथ ही पार्टी की इस स्थिति को उन्होंने निराशाजनक भी बताया है. कर्ण सिंह ने यह बात एक बयान जारी करके कही है. इस बयान से उन्होंने यह भी कहा है, ‘राहुल गांधी ने 25 मई को अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का साहसिक फैसला किया. लेकिन उनके इस फैसले का सम्मान करने के बजाय पार्टी नेताओं ने उनसे इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध करने में एक महीने का समय बर्बाद कर दिया.’

इसके साथ ही कर्ण सिंह ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) से जल्द से जल्द बैठक बुलाने का आग्रह किया है. साथ ही सुझाव दिया है, ‘यह बैठक पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में बुलाई जाए. जब तक पार्टी का नया अध्यक्ष न चुन लिया जाए तब तक के लिए एक कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति की जाए.’ उन्होंने आगे कहा, ‘मेरे विचार में अध्यक्ष के साथ चार कार्यकारी अध्यक्ष/उपाध्यक्ष भी ​बनाए जाएं. जिन्हें उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम का दायित्व सौंपा जाए. इससे युवा नेतृत्व को आगे लाने में मदद मिलेगी.’

कर्ण सिंह के मुताबिक अगर पार्टी की मौजूदा अनिश्चितता इसी तरह कुछ और वक्त तक रहती है तो इससे कार्यकर्ताओं के साथ मतदाताओं के हौसले पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. इससे पहले कि इसमें और देर हो इस नकारात्मकता को खत्म किया जाना जरूरी है.

इससे पहले लोकसभा के पिछले चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के मद्देनजर मई के महीने में पार्टी की एक बैठक के दौरान राहुल गांधी ने कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश की थी. लेकिन तब पार्टी नेताओं ने उसे अस्वीकार कर दिया था. हालांकि राहुल गांधी अपने फैसले पर अड़े रहे थे. इसके बाद पिछले हफ्ते औपचारिक तौर पर उन्होंने इस पद को छोड़ने का ऐलान भी किया था. उनका यह भी कहना था कि अब वह पार्टी के मुखिया नहीं हैं ऐसे में सीडब्ल्यूसी से जल्दी ही नया अध्यक्ष चुन लेना चाहिए. हालांकि पार्टी की तरफ से आधिकारिक तौर पर राहुल गांधी का इस्तीफा मंजूर कर लिए जाने की अब तक कोई घोषणा नहीं हुई है.