दिल्ली से लखनऊ के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस किसी प्राइवेट कंपनी द्वारा चलाई जाने वाली पहली ट्रेन बनने जा रही है. ट्रेनों के संचालन को निजी कंपनियों को सौंपे जाने के खिलाफ जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच रेलवे ने निजी क्षेत्र से हाथ मिलाने की तैयारी कर ली है. पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि रेलवे ने 100 दिन के एजेंडे के तहत अपनी दो ट्रेनों के संचालन की कमान निजी हाथों में देने के संकेत दिए हैं. इनमें एक ट्रेन तेजस होगी.

ट्रेनों के निजीकरण को लेकर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘यह प्रयोग दो ट्रेनों के साथ किया जाएगा. हमें उम्मीद है कि अगले 100 दिनों के अंदर हम कम से कम एक ट्रेन को निजी संचालकों के हाथों में सौंप देंगे. हमने इन रूट्स को चुनने के दौरान यह ध्यान रखा कि इन पर भीड़ कम हो. जल्द ही दूसरी ट्रेन को भी चुन लिया जाएगा.’ बता दें कि दिल्ली-लखनऊ रूट पर अभी कुल 53 ट्रेनें चलती हैं. इनमें से एक भी राजधानी नहीं है. खबर के मुताबिक इस रूट पर चलने वाली स्वर्ण शताब्दी का टिकट सबसे ज्यादा महंगा रहता है.

समाचार एजेंसी के मुताबिक सौ दिनों की योजना को लेकर रेलवे के प्रस्ताव में ऑपरेटर्स को दो ट्रेनें देने का ऑफर दिया गया था. उधर, रेलवे के इस प्रस्ताव को लेकर रेलवे यूनियनों में नाराजगी है. उन्होंने ट्रेनों को निजी हाथों में सौंपे जाने की कड़ी आलोचना की है, साथ ही इस मुद्दे पर बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है.