सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह बिल्डरों की परियोजनाओं में घर खरीदने वालों के हित सुरक्षित रखने के लिए एक नीति बनाए. अदालत ने कहा कि देश में ऐसे लाखों लोग हैं जिन्हें बिल्डरों ने वक्त पर घर नहीं दिया और जो अब परेशान हैं कि आगे क्या होगा. सुप्रीम कोर्ट का यह भी कहना था कि अब इन बिल्डरों पर कानूनी कार्रवाई के दौरान लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. केंद्र को जवाब देने के लिए 11 जुलाई तक का वक्त दिया गया है.

शीर्ष अदालत ने यह निर्देश जेपी इंफ्राटेक से घर खरीदने वालों लोगों की एक याचिका पर सुनाया. इस याचिका में अनुरोध किया गया था कि शीर्ष अदालत कंपनी के ‘लिक्विडेशन प्रोसेस’ में दखल देकर इसे रुकवाए. लिक्विडेशन प्रोसेस यानी एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें अगर कोई कंपनी एक तय समय सीमा के भीतर अपनी देनदारियां नहीं चुका पाती तो उसे बंद कर दिया जाता है और उसकी परिसंपत्तियां बकाएदारों में बांट दी जाती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया में तो दखल नहीं दे सकती, लेकिन घर खरीदारों की समस्या के समाधान के लिए कोई न कोई रास्ता निकालना जरूरी है.

दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई शहरों में अधूरे प्रोजेक्ट्स बड़ी समस्या बन गए हैं. इनके चलते लाखों लोगों के अपने घर का सपना अधर में लटक गया है. घर खरीदारों की शिकायत पर कानूनी कार्रवाई के चलते यूनिटेक और आम्रपाली जैसी चर्चित कंपनियों के मालिक जेल पहुंच गए हैं तो कइयों पर इसका खतरा मंडरा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर काफी कड़ा रुख अपनाया हुआ है.