केंद्रीय कैबिनेट ने किन्नरों (ट्रांसजेंडर) की सुरक्षा के लिए ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों की रक्षा) विधेयक’ को मंजूरी दे दी है. सरकार की तरफ से इस विधेयक को लेकर जारी एक वक्तव्य में कहा गया है कि इसका मकसद किन्नरों के लिए ऐसा तंत्र विकसित करना है जिसमें उनका सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण हो सके. द इकॉनॉमिक टाइम्स के मुताबिक यह विधेयक मोदी सरकार के 100 दिन के एजेंडा में शामिल है और इसे संसद के वर्तमान सत्र में ही पारित कराया जाएगा.

इस विधेयक में लैंगिक आधार पर किन्नरों को परिभाषित भी किया गया है. इसके मुताबिक अगर किसी व्यक्ति का जेंडर (लिंग) उस जेंडर से मेल नहीं खाता जिसके तहत उसे जन्म के समय रखा गया था, तो वह ट्रांसजेंडर कहलाएगा. वहीं इस विधेयक के मुताबिक ऐसे किसी व्यक्ति को अपनी पुरुष, स्त्री या किन्नर पहचान रखने का अधिकार होगा. साथ ही इसमें प्रावधान है कि किसी व्यक्ति को ट्रांसजेंडर तभी माना जाएगा जब जिला स्तर पर बनी एक समिति यह प्रमाणित कर देगी.

साथ ही यह विधेयक उनके साथ किसी भी प्रकार से भेदभाव को प्रतिबंधित करता है. इस विधेयक में यह भी प्रावधान है कि सरकार एक बीमा योजना के जरिए किन्नरों की सेक्स से संबंधित सर्जरी, हार्मोन थैरेपी और स्वास्थ्य से जुड़े इसी प्रकार के खर्चों को उठाएगी. साथ ही किन्नरों के लिए एक राष्ट्रीय परिषद का गठन भी किया जाएगा. यह परिषद इन लोगों से जुड़ी नीतियों-कानूनों पर सरकार को सलाह देगी और इनकी समस्याओं का समाधान करेगी.

इस विधेयक को लेकर सरकार द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया है कि ये लोग सामाजिक बहिष्कार और भेदभाव का शिकार होते हैं. वहीं इनकी शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और नौकरियों तक पहुंच नहीं है. सरकार के मुताबिक, ‘यह विधेयक बड़ी संख्या में किन्नरों के लिए मददगार साबित होगा... और इन्हें मुख्यधारा में लाएगा.’

मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में यह विधेयक लोकसभा से पारित हो चुका था, लेकिन फिर बाद में लोकसभा भंग होने की वजह से यह रद्द हो गया.