विश्व कप 2019 के दूसरे सेमीफाइनल में भिड़ रहे इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया अब विश्व कप खिताब से महज दो कदम दूर हैं. इस मुकाबले में कौन जीतेगा, इस सवाल पर क्रिकेट के जानकारों से लेकर सटोरियों तक सबकी राय अमूमन एक ही है. सभी इन दोनों टीमों की संभावनाएं बराबर मान रहे हैं.

इसकी वजहें भी हैं. दरअसल इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का पुराना रिकॉर्ड और इस विश्व कप में दोनों टीमों का अब तक का प्रदर्शन देखते हुए पक्के तौर पर कहना मुश्किल है कि कौन जीतेगा. आंकड़े बताते हैं कि ऑस्ट्रेलिया आज तक विश्व कप के सेमीफाइनल में कभी नहीं हारी है. यह टीम अब तक आठ बार विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंची है और आठों बार जीती है. वर्तमान में भी वह विश्व चैंपियन है.

उधर, इंग्लैंड विश्व कप जैसे टूर्नामेंट की शुरुआत होने के बाद लगातार पांच बार सेमीफाइनल में पहुंचा है. तीन बार वह जीता जबकि दो मैचों में उसे हार का मुंह देखना पड़ा. बीते 27 सालों में वह पहली बार इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंचा है. अगर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के विश्व मुकाबलों को देखें तो दोनों का अब तक आठ बार आमना-सामना हुआ है. इनमें छह बार ऑस्ट्रेलिया जीती और महज दो बार इंग्लैंड को जीत हासिल हुई है.

एक तथ्य यह भी है कि विश्व कप में इंग्लैंड बीते 27 सालों में ऑस्ट्रेलिया को कोई मुकाबला नहीं हरा सका है. जो दो मुकाबले उसने जीते हैं वे 1979 और 1992 विश्व कप में हुए थे. अगर विश्व कप के बड़े मुकाबलों की बात करें तो ये दोनों टीमें अब तक एक बार सेमीफाइनल (1975) और एक बार फाइनल (1987) में एक-दूसरे से भिड़ी हैं. और दोनों ही बार फतह ऑस्ट्रेलिया को मिली. यानी इस तरह से देखें तो साफ़ तौर पर ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारी दिखता है.

लेकिन, इतिहास से उलट अगर वर्तमान पर नजर डालें तो इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया से कम नहीं आंका जा सकता. पिछले विश्व कप में लीग मैचों में ही टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद उसने अपनी टीम में बड़े बदलाव किए. जनवरी 2017 के बाद से उसने ऑस्ट्रेलिया, भारत और दक्षिण अफ्रीका जैसी दमदार टीमों के खिलाफ भी कोई भी द्विपक्षीय एकदिवसीय श्रृंखला नहीं हारी है.

अगर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के मुकाबलों की बात करें तो बीते चार सालों में इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जिस तरह का क्रिकेट खेला है वह चौंकाने वाला है. आठ सितंबर 2015 के बाद से उसके और ऑस्ट्रेलिया के बीच 15 वनडे मैच हुए, जिनमें से विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को 12 मैचों में हार का सामना करना पड़ा.

वर्तमान से जुड़ा एक और तथ्य ऐसा है जो सेमीफाइनल में इंग्लैंड के इक्कीस होने की बात कहता है. दरअसल, आज का सेमीफाइनल मुकाबला बर्मिंघम के एजबेस्टन क्रिकेट मैदान पर है. यह मैदान न केवल इंग्लैंड की बड़ी मजबूती माना जाता है बल्कि ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए अधिकांश मौकों पर यह कमजोरी जैसा साबित हुआ है.

ऑस्ट्रेलियाई टीम को एजबेस्टन में इंग्लैंड के खिलाफ अब तक नौ एकदिवसीय मैचों में से केवल तीन में ही जीत मिली है. उसने इंग्लैंड को इस मैदान पर आखिरी वनडे मैच 26 साल पहले 1993 में हराया था. यही नहीं ऑस्ट्रेलिया ने इस मैदान पर एशेज श्रृंखला के दौरान 14 टेस्ट मैच खेले जिनमें वह केवल तीन ही जीत सका. इसके विपरीत इंग्लैंड ने बर्मिंघम के इस मैदान पर सभी प्रारूपों में अपने पिछले सभी 10 मैच जीते हैं. इस विश्व कप में भी उसने भारत जैसी मजबूत टीम को यहां पर शिकस्त दी है.

इंग्लैंड के लिए यह मुकाबला बर्मिंघम में होना एक और वजह से भी अच्छा माना जा रहा है. बर्मिंघम के क्रिकेट प्रशंसक इंग्लैंड के अन्य शहरों की तुलना में ज्यादा आक्रामक और शोर-शराबे वाले माने जाते हैं. अपनी टीम को बढ़-चढ़कर समर्थन करने के चलते अक्सर वे सीमाएं पार करते भी देखे गए हैं.

इंग्लिश बल्लेबाज जो रूट के बयान से पता चलता है कि इंग्लैंड की टीम इसे लेकर भी खासी उत्साहित है. सेमीफाइनल मुकाबले की पूर्व संध्या पर जो रूट ने कहा, ‘हमारे दिमाग में यह बात हर समय चल रही है कि एजबेस्टन में हमारा रिकॉर्ड बहुत शानदार है. हम वास्तव में यहां खेलने का आनंद लेते हैं और हमेशा हमें अच्छा समर्थन मिलता है. यहां के दर्शक हमारे अंदर लगातार विश्वास की भावना जगाए रहते हैं, इससे फर्क पड़ता है. वे स्टैंड में उछलें या शोर शराबा करें, लेकिन उनका सपोर्ट मायने रखता है.’

अगर दोनों टीमों के खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो दोनों में 21 और 19 का फर्क कर पाना मुश्किल है. ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर और कप्तान आरोन फिंच की जोड़ी शानदार खेल दिखा रही है. यह जोड़ी इस टूर्नामेंट में अब तक 1,100 से ज्यादा रनों का ढेर लगा चुकी है. दोनों ही रणनीति के तहत शुरू में धैर्य के साथ खेलते हैं और फिर शुरूआती 15 ओवरों के बाद ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हैं.

इंग्लैंड की बल्लेबाजी भी जॉनी बैरिस्टो और जेसन रॉय की सलामी जोड़ी पर ज्यादा निर्भर रही है. दोनों ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए विपक्षी गेंदबाजों पर शुरू से ही हावी हो जाते हैं और उन्हें रक्षात्मक गेंदबाजी करने पर मजबूर कर देते हैं. बैरिस्टो पिछले दो मैचों में लगातार दो शतक बनाकर कुल 462 बना चुके हैं जबकि बेहतरीन फॉर्म में दिख रहे जेसन रॉय ने भी पांच पारियों में 341 रन बनाए हैं. हालांकि, दोनों टीमों में कई बल्लेबाज बेहतर खेल दिखा रहे हैं, लेकिन जहां ऑस्ट्रेलिया की टीम में मध्यक्रम में स्टीव स्मिथ की फॉर्म चिंता का कारण बनी हुई है, वहीं इंग्लैंड के जोस बटलर ने पाकिस्तान के खिलाफ शानदार शतक बनाने के बाद से अपनी पांच पारियों में 2, 10, 25, 20, 11 रन बनाए हैं.

गेंदबाजी के मोर्चे पर ऑस्ट्रेलिया के मिचेल स्टॉर्क और पैट कमिंस काफी अच्छा कर कर रहे हैं. स्टॉर्क इस विश्व कप में अब तक सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए हैं. 26 विकेट लेकर वे गेंदबाजों की सूची में पहले स्थान पर हैं. टूर्नामेंट में स्लो बाउंसर और वाइड यॉर्कर उनका प्रमुख हथियार रहे हैं. जब भी कप्तान उन्हें गेंद थमाता है वे विकेट निकाल कर दते हैं.

हालांकि, इंग्लैंड के पास स्टॉर्क जैसा गेंदबाज नहीं है, लेकिन इससे यह नहीं कहा जा सकता कि उसकी गेंदबाजी में धार नहीं है. इस टूर्नामेंट में मैच के शुरुआती ओवरों में क्रिस वोक्स, जोफ्रा आर्चर और मार्क वुड की गेंदों को खेलना बल्लेबाजों के लिए आसान नहीं रहा है. इसके बाद मध्य के ओवरों में लियाम प्लंकेट और बेन स्टोक्स भी अपनी जिम्मेदारी को अच्छे संभाल रहे हैं. इनके अलावा ऑस्ट्रेलिया के लिए आदिल राशिद की स्पिन को खेलना आसान नहीं होगा.

यानी कुल मिलाकर देखें तो इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के आज के मैच में कांटा बराबरी पर ही अटका हुआ है. जानकारों और सटोरियों की राय से अलग भी कोई यह नहीं कह सकता कि आज के मैच में कौन 21 और कौन 19 साबित होगा!