भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को गुरुवार को तब बड़ा झटका लगा जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसकी एक याचिका खारिज दी. खबरों के मुताबिक इस याचिका के जरिये विजय माल्या ने सरकारी एजेंसियों द्वारा उसकी संपत्तियों को जब्त किए जाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की थी. साथ ही यह भी कहा था कि बॉम्बे हाईकोर्ट में उसने उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी (एफईओ) घोषित किए जाने को चुनौती दे रखी है. ऐसे में जब तक हाईकोर्ट इस याचिका पर सुनवाई पूरी नहीं कर लेता तब तक संपत्तियां जब्त किए जाने पर रोक लगाई जानी चाहिए.
विजय माल्या के खिलाफ भारत में बैंकों के साथ नौ हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के अलावा मनी लॉन्डरिंग के मामले भी दर्ज हैं. इन मामलों में उसे वांछित माना गया है. वहीं इसी साल जनवरी में उसे स्पेशल प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट के तहत आर्थिक भगोड़ा अपराधी भी घोषित किया था. तब विजय माल्या इस कानून जरिये घोषित देश का पहला भगोड़ा आर्थिक अपराधी भी बना था.
वहीं धोखाधड़ी के मामलों से बचने के लिए मार्च 2016 में वह लंदन भाग गया था और उसके बाद से वहीं रह रहा है. इस बीच भारतीय एजेंसियों ने माल्या को भारत वापस लाने की काफी कवायद की है जिसमें वे काफी हद तक सफल भी हुई हैं. लेकिन बीते दो जून को लंदन के हाईकोर्ट ने उसे प्रत्यर्पण मामले में अपील करने की अनुमति दे दी थी. वह उसके लिए बड़ी राहत थी. बताया जाता है कि अगर तब वहां के हाईकोर्ट से उसे राहत नहीं मिली होती तो जल्दी ही उसे भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता था.
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