इन दिनों खाने के ऑनलाइन ऑर्डर और उसकी सप्लाई (ऑनलाइन फूड डिलीवरी) का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. इसके चलते इस क्षेत्र में कई सप्लाई कंपनियां और खाना बनाने वाली इकाइयां उतर रही हैं. वहीं अब एक चौंकाने वाली लेकिन अच्छी खबर यह भी आई है कि केरल में एक जेल की खाना बेचने वाली व्यवसायिक इकाई भी इस क्षेत्र में उतर गई है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के त्रिशूर जिले में स्थित विय्यूर केंद्रीय जेल की ‘द फ्रीडम फूड फैक्टरी’ ने गुरुवार से खाना ऑनलाइन उपलब्ध कराने की सुविधा शुरू की है. अब तक यहां सिर्फ जेल के सामने बने काउंटर से ही बिरयानी, रोटी और कई तरह की बनी-बनाई सब्जियां आदि खरीदी जा सकती थीं.

इस रिपोर्ट में जेल के अधीक्षक निर्मलानंदन नायर बताते हैं कि जेल के खाने की ऑनलाइन डिलीवरी का विचार राज्य के लोकप्रिय आईपीएस अधिकारी ऋषि राज सिंह के दिमाग की उपज है. सिंह इस समय जेल विभाग के महानिदेशक हैं. नायर के मुताबिक ऋषि राज सिंह का यह मानना था कि कैदियों द्वारा तैयार किया गया खाना अगर आम जनता को पसंद आता है और उसकी जेब के हिसाब से भी सही है तो इसे ऑनलाइन डिलीवरी सिस्टम के जरिए उन लोगों तक भी पहुंचाया जा सकता है जो जेल के काउंटर तक नहीं आ सकते. इसी विचार के तहत विय्यूर जेल में यह पहल शुरू हुई है.

विय्यूर जेल के अधिकारियों ने ऑनलाइन डिलीवरी के लिए एक अलग मेन्यू तैयार किया है. फिलहाल यहां ‘फ्रीडम कॉम्बो लंच’ का ऑर्डर दिया जा सकता है. इसके तहत ग्राहकों को 300 ग्राम बिरयानी, एक रोस्टेड चिकन लेग पीस, तीन रोटी, एक चिकन करी, अचार, सलाद, एक मिनरल वॉटर बॉटल और मीठे के तौर पर एक कप केक दिया जाएगा. इस कॉम्बो की कीमत 127 रुपये होगी. साथ ही यह खाना केले के पत्तों के साथ ग्राहकों को पहुंचाया जाएगा. नायर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है, ‘शुरुआती योजना के मुताबिक हम हर दिन करीब सौ कॉम्बो बेचना चाहते हैं. अगर मांग बढ़ती है तो फिर हम सप्लाई भी बढ़ा देंगे.’

जेल के सामने बने काउंटर से इस समय हर दिन 25 से 30 हजार के बीच रोटियां, पांच से छह सौ के बीच चिकन बिरयानी, 300 सब्जियां और चिकन करी बिकती हैं. विय्यूर जेल में खाना बनाने की जिम्मेदारी करीब सौ कैदी संभालते हैं और अलग-अलग खाना तैयार करने के लिए इनकी अलग-अलग टीम बनी हुई हैं. वहीं खाना बनने के दौरान जेल के अधिकारी इसकी गुणवत्ता पर लगातार नजर रखते हैं. यहा खाना बनाने के काम में लगे कैदियों को हर दिन 150 रुपये का मेहनताना मिलता है और खाने के कारोबार से जो मुनाफा होता है उसे जेल के रखरखाव और उसकी जरूरतों पर खर्च किया जाता है.