रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रेलवे के निजीकरण की विपक्ष की आशंकाओं को सिरे से खारिज किया है. पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘रेलवे का कोई निजीकरण कर ही नहीं सकता और इसके निजीकरण का कोई मतलब नहीं है.’ पीयूष गोयल का यह भी कहना था कि राजनीतिक लाभ के लिए नयी ट्रेनों का सपना दिखाने के बजाय नरेंद्र मोदी सरकार ने सुविधाएं और निवेश बढ़ाने के लिए रेलवे में सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) आमंत्रित करने का इरादा किया है.

पीयूष गोयल ने ये बातें लोकसभा में कहीं. रेल मंत्री ने कहा, ‘मैं बार-बार कह चुका हूं कि रेलवे का निजीकरण नहीं किया जाएगा. लेकिन कोई सुविधा बढ़ाने की बात करे, प्रौद्योगिकी लाने की बात करे, कोई नया स्टेशन बनाने की बात करे, कोई हाई स्पीड, सेमी हाई स्पीड ट्रेन चलाने की बात करे तो इसके लिये निवेश आमंत्रित किया जाना चाहिए.’ पीयूष गोयल ने कहा कि रेलवे में सुविधा बढ़ाने के साथ गांवों और देश के विभिन्न हिस्सों को रेल संपर्क से जोड़ने के लिये बड़े निवेश की जरूरत है.

इससे पहले कांग्रेस, तृणमूल और द्रमुक सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया था कि आम बजट में रेलवे में पीपीपी, निगमीकरण और विनिवेश पर जोर देने की आड़ में इसे निजीकरण के रास्ते पर ले जाया जा रहा है. विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार को बड़े वादे करने की बजाय रेलवे की वित्तीय स्थिति सुधारने तथा सुविधा, सुरक्षा और सामाजिक जवाबदेही का निर्वहन सुनिश्चित करना चाहिए.

इस पर पीयूष गोयल ने कहा, ‘रेलवे बजट पहले जनता को गुमराह करने के लिए होते थे, राजनीतिक लाभ के लिए नयी ट्रेनों के सपने दिखाए जाते थे.’ उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेल बजट का आम बजट में विलय करने की पहल करके देशहित का काम किया है. अब जो काम किया जा सकता है, उसकी घोषणा ही होती है और काम होता है. पीयूष गोयल का आगे कहना था कि रेलवे की बेहतरी और इसमें सुविधाओं को बढ़ाने के लिये अगले 10-12 साल में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश करने का इरादा किया गया है.