झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले में बीते महीने मॉब लिचिंग (भीड़ द्वारा हिंसा) का शिकार हुए तबरेज अंसारी की मौत पुलिस की अनदेखी और डॉक्टरों की लापरवाही से हुई थी. एनडीटीवी के मुताबिक यह बात इस मामले की जांच करने वाले दल ने कही है. सब डिविजनल अधिकारी और जिला सिविल सर्जन के सदस्यों वाले इस दल का यह भी कहना है कि भीड़ द्वारा तबरेज अंसारी के ​साथ मारपीट किए जाने की सूचना पुलिस को मिल चुकी थी. फिर भी पुलिस देर से मौके पर पहुंची थी. इसके अलावा जिन डॉक्टरों ने उसका इलाज किया उन्होंने इस मामले को ‘गंभीरता’ से नहीं लिया.

इससे पहले बीती 18 जून को तबरेज अंसारी अपने दोस्तों के साथ कहीं जा रहे थे. उसी दौरान कुछ लोगों ने उन्हें मोटरसाइकिल चुराने के आरोप में पकड़ लिया था. इसके बाद भीड़ ने उनकी बेरहमी से पिटाई की साथ ही उन्हें ‘जय श्रीराम’ और ‘जय हनुमान’ बोलने के लिए भी मजबूर किया. बाद में इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ था. वहीं पुलिस को मामले की जानकारी मिलने के बाद उसने अंसारी को गिरफ्तार कर लिया था. गिरफ्तारी के चार दिन बाद जब उनकी हालत बिगड़ने लगी तो पुलिस ने उन्हें एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी मौत हो गई थी.

इधर, तबरेज अंसारी की मौत के मामले में अब तक 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. वहीं काम में लापरवाही बरतने को लेकर दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित भी किया गया है. जहां तक डॉक्टरों का संबंध है तो प्रशासन का कहना है कि कानूनी सलाह-मशविरे के बाद ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई का फैसला किया जाएगा. इस दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने भी इस मामले पर संज्ञान लेते हुए सरकार से रिपोर्ट तलब की थी.