पाकिस्तान ने भारत से कहा है कि वह उसकी वाणिज्यिक उड़ानों के लिये अपने हवाई क्षेत्र को तब तक नहीं खोलेगा, जब तक कि भारतीय वायुसेना के अग्रिम एयरबेस से लड़ाकू विमानों को नहीं हटा लिया जाता. पाकिस्तान के विमानन सचिव शाहरुख नुसरत ने गुरूवार को एक संसदीय समिति को यह जानकारी दी है.

पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर किए गए भाारतीय वायुसेना के हमले के बाद पाकिस्तान ने अपने हवाई क्षेत्र को पूरी तरह से बंद कर दिया था.

पीटीआई के मुताबिक बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद संभवत: यह पहला मौका है, जब किसी वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने पाक हवाई क्षेत्र को फिर से खोलने के लिए इस्लामाबाद की पूर्व शर्त का सार्वजनिक तौर पर जिक्र किया है.

‘डॉन न्यूज’ की खबर के अनुसार शाहरुख़ नुसरत ने गुरूवार को विमानन पर सीनेट की स्थायी समिति को बताया, ‘हमारे विभाग ने भारतीय अधिकारियों को सूचना दी है कि पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र भारत के इस्तेमाल के लिये तब तक उपलब्ध नहीं होगा, जब तक कि भारतीय वायुसेना भारत के अग्रिम एयरबेस से अपने लड़ाकू विमानों को हटा नहीं लेती.’

नागरिक विमाान प्राधिकरण के महानिदेशक नुसरत ने समिति को यह भी बताया कि भारत सरकार ने उनसे संपर्क कर हवाई क्षेत्र खोलने का अनुरोध किया था. इसके जवाब में उन्होंने भारत को अपनी इन चिंताओं से अवगत कराया.

बीते महीने पाकिस्तान ने अपने हवाई क्षेत्र में लगे इस प्रतिबंध को 12 जुलाई के लिए बढ़ा दिया था. इससे पहले इस प्रतिबंध की अवधि 30 जून तक के लिए बढ़ाई गई थी. एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से सभी यात्री विमानों को भारत द्वारा वैकल्पिक मार्गों पर परिचालित किया जा रहा है.

पाकिस्तान द्वारा अपने हवाई क्षेत्र में लगाए गए इस प्रतिबंध से भारतीय विमानन उद्योग को भारी नुकसान पहुंचा है. बीते गुरूवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद को बताया था कि पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के बंद रहने के चलते एयर इंडिया को लंबे मार्गों पर 430 करोड़ रूपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े हैं.