असम में बाढ़ ने तबाही मचा दी है. इसके चलते अब तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में छह लोगों की मौत की खबर है. बह्मपुत्र सहित राज्य की सभी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. असम के 33 में से 21 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं. इनमें रहने वाली करीब आठ लाख की आबादी को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. 27 हजार हेक्टेयर से भी ज्यादा कृषि भूमि को बाढ़ का पानी लील गया है. अभी तक सात हजार से भी ज्यादा लोगों को अलग-अलग जगहों पर बने 68 राहत शिविरों में पहुंचाया जा चुका है.

बाढ़ से निचले असम का बारपेटा इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित है जहां तीन लाख से ज्यादा लोगों का संपर्क मुख्यधारा से कट गया है. काजीरंगा राष्ट्रीय अभ्यारण्य में भी बाढ़ का पानी घुस गया है. पीटीआई से बातचीत में काजीरंगा संभागीय वन अधिकारी रुहिनी सैकिया ने बताया कि इसके कारण अधिकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग से होकर गुजरने वाहनों की आवाजाही सीमित करने के लिये सड़क पर अवरोधक लगा दिए हैं. इसके अलावा अभ्यारण्य के आस-पास सीआरपीसी की धारा 144 लगा दी गई है. इसकी वजह यह है कि बाढ़ की वजह से जानवर यहां से निकलकर अपनी सुरक्षा के लिए ऊंचाई वाले स्थानों की तलाश में राष्ट्रीय राजमार्ग को पार कर कार्बी आंगलोंग पर्वतीय क्षेत्र की ओर जा रहे हैं. बाढ़ के चलते सड़क और रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं. पूर्वोत्तर फ्रंटियर रेलवे के सूत्रों ने बताया कि बाढ़ के पानी की वजह से रेलवे अधिकारियों को लुमडिंग-बदरपुर पर्वतीय खंड में ट्रेन सेवाएं नियंत्रित करनी पड़ीं.

उधर, असम के पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश के बाद हुए भूस्खलन के कारण दो छात्राओं की मौत की खबर है. पीटीआई के मुताबिक यह घटना तवांग जिले की है जहां एक स्कूल के छात्रावास पर चारदीवारी गिर गई.