आने वाले सालों में देश में भारी जल संकट की आशंका के बीच एक अच्छी खबर उत्तर-पूर्व से आई है. यहां का बांग्लादेश से सटा पहाड़ी राज्य मेघालय जल नीति बनाने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को राज्य कैबिनेट ने जल नीति के एक मसौदे को मंजूरी दी है. न्यूज18 की खबर के मुताबिक जल नीति के इस मसौदे के तहत बारिश का पानी संरक्षित करने के लिए चेक डेम बनाए जाएंगे, भूजल के अनियंत्रित दोहन को रोका जाएगा और पानी की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाएगा.

कल मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में जल नीति के इस मसौदे पर लंबी चर्चा हुई थी. इसके बाद उप मुख्यमंत्री प्रेस्टोन टाइनसॉन्ग ने कहा कि इस नीति का मकसद पानी को साझा संसाधन की तरह पहचान दिलाना है और इसके साथ पीने, घरेलू इस्तेमाल, स्वच्छता आदि के लिए साफ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है. इस दौरान टाइनसॉन्ग का यह भी कहना था, ‘मेघालय जल नीति तैयार करने वाला देश का पहला राज्य है. इसे सभी संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा करने के बाद तैयार किया गया है और जल्दी की इसकी अधिसूचना जारी की जाएगी.’

मेघालय के उप मुख्यमंत्री के मुताबिक इस जल नीति के तहत पानी के इस्तेमाल और पानी के स्रोतों के संरक्षण की रूपरेखा तैयार की गई है. इसमें सामुदायिक स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी और गांवों के स्तर पर इकाइयां बनाई जाएंगी.

मेघालय पहाड़ी राज्य है. यहां भारी बारिश होती है लेकिन यह पानी यहां ठहर नहीं पाता और कुछ ही घंटों के भीतर पड़ोसी देश बांग्लादेश में बह जाता है. टाइनसॉन्ग ने यह जानकारी देते हुए कहा है कि इस जल नीति के तहत बारिश के इस पानी को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बांध बनाए जाएंगे और इनसे जुड़े जलाशयों का इस्तेमाल और दूसरे कामों के लिए भी किया जाएगा.