भारत की मांग के आगे झुकते हुए पाकिस्तान ने करतारपुर कॉरीडोर पर बातचीत के लिए बनी समिति से खालिस्तान समर्थक नेता का नाम हटा लिया है. इस समिति को 14 जुलाई को भारत के साथ दूसरे चक्र की बातचीत करनी है, लेकिन इससे पहले भारत सरकार की तरफ से इसमें खालिस्तान समर्थक नेता गोपाल सिंह चावला के शामिल होने पर आपत्ति जता दी गई थी.

गोपाल सिंह चावला पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (पीएसजीपीसी) का सदस्य है. पीएसजीपीसी भारत के साथ सिख तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और कॉरीडोर के बुनियादी ढांचे के विकास के मामले में बातचीत कर रही है.

एनडीटीवी की खबर के मुताबिक पाकिस्तान सरकार की तरफ से जारी एक वक्तव्य में कहा गया है कि वहां की संघीय सरकार ने पीएसजीपीसी का पुनर्गठन किया है. इसके साथ ही उन लोगों की सूची जारी की गई है जो इसमें शामिल हैं. इसमें गोपाल सिंह चावला का नाम हटा दिया गया है.

चावला बीते साल उस समय चर्चा में आया था जब उसने भारतीय अधिकारियों को लाहौर के एक गुरुद्वारे में भारत से पहुंचे सिख तीर्थयात्रियों से मिलने से रोक दिया था. इसके अलावा बीते साल नवंबर में अमृतसर के निरंकारी भवन पर हुए ग्रेनेड बम हमले की जांच में भी उसका नाम सामने आया था. इस हमले में तीन लोगों की मौत हुई थी. माना जाता है कि चावला पाकिस्तान स्थित मुंबई हमलों के मास्टर माइंड हाफिज सईद का करीबी है.

पाकिस्तान स्थित करतारपुर के लिए कहा जाता है कि गुरु नानक ने यहीं अंतिम सांसें ली थीं. भारत से हजारों सिख तीर्थयात्री हर साल गुरु नानक की जयंती मनाने के लिए पाकिस्तान जाते हैं. यहां बनने जा रहा कॉरीडोर करतारपुर के दरबार साहिब को भारत के पंजाब में गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक तीर्थस्थल से जोड़ेगा जिससे श्रद्धालुओं को आने-जाने में काफी आसानी हो जाएगी. इस कॉरीडोर के जरिए यात्रा के लिए सिख तीर्थयात्रियों को वीजा की जरूरत नहीं होगी.