भूषण पॉवर एवं स्टील ने पंजाब नेशनल बैंक से 3,800 करोड़ की धोखाधड़ी की | रविवार, 07 जुलाई 2019

नीरव मोदी के हाथों 13,000 करोड़ रुपए की चोट खा चुके पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में अब 3,800 करोड़ रुपए की एक और धोखाधड़ी का खुलासा हुआ. पीएनबी ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि बैंक के अधिकारियों ने भूषण पॉवर एवं स्टील लिमिटेड (बीपीएसएल) की 3,800 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पता लगाया है. बैंक ने इस बारे में आरबीआई को रिपोर्ट दे दी है.

पीटीआई के मुताबिक पीएनबी की ओर से कहा गया कि भूषण पॉवर एंड स्टील लिमिटेड ने बैंक कर्ज में धोखाधड़ी की और बैंकों के समूह से कोष जुटाने को लेकर अपने बही-खतों में गड़बड़ की. बैंक ने शेयर बाजारों को दी गई सूचना में कहा, ‘बैंक ने फोरेंसिक ऑडिट जांच और स्वत: संज्ञान लेकर बीपीएसएल और उसके निदेशकों के खिलाफ सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर आरबीआई को 3,805.15 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की रिपोर्ट दी है.’

सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश को लेकर दाखिल हिंदू महासभा की याचिका खारिज की | सोमवार, 08 जुलाई 2019

मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश को लेकर लगाई गई एक याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. इस याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा है कि अगर इस संबंध में कोई मुस्लिम महिला अपील करती है तो कोर्ट इस पर जरूर सुनवाई करेगा. यह याचिका अखिल भारतीय हिंदू महासभा की केरल इकाई के अध्यक्ष स्वामी साई स्वरूपनाथ ने लगाई थी. इसके साथ ही उन्होंने तर्क दिया था कि जिस तरह केरल के सबरीमला मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश का अधिकार है उसी तरह मस्जिदों में भी महिलाओं को प्रवेश मिलना चाहिए.

इससे पहले इस संबंध में हिंदू महासभा ने केरल हाईकोर्ट में भी एक याचिका लगाई थी. तब उस पर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के चीफ जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस एके जयशंकरन नांबियार ने इस पर सुनवाई की थी. दो जजों की इस बेंच ने इस पर बीते साल अक्टूबर में फैसला सुनाया था. साथ ही कहा था कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में नाकाम रहा है कि मस्जिद में महिलाओं को प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है. केरल हाईकोर्ट के उसी फैसले के बाद साई स्वरूपनाथ ने सुप्रीम कोर्ट का दवाजा खटखटाया था.

तेजस एक्सप्रेस किसी प्राइवेट कंपनी द्वारा चलाई जाने वाली देश की पहली ट्रेन होगी | मंगलवार, 09 जुलाई 2019

दिल्ली से लखनऊ के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस किसी प्राइवेट कंपनी द्वारा चलाई जाने वाली पहली ट्रेन बनने जा रही है. ट्रेनों के संचालन को निजी कंपनियों को सौंपे जाने के खिलाफ जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच रेलवे ने निजी क्षेत्र से हाथ मिलाने की तैयारी कर ली है. पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि रेलवे ने 100 दिन के एजेंडे के तहत अपनी दो ट्रेनों के संचालन की कमान निजी हाथों में देने के संकेत दिए हैं. इनमें एक ट्रेन तेजस होगी.

ट्रेनों के निजीकरण को लेकर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘यह प्रयोग दो ट्रेनों के साथ किया जाएगा. हमें उम्मीद है कि अगले 100 दिनों के अंदर हम कम से कम एक ट्रेन को निजी संचालकों के हाथों में सौंप देंगे. हमने इन रूट्स को चुनने के दौरान यह ध्यान रखा कि इन पर भीड़ कम हो. जल्द ही दूसरी ट्रेन को भी चुन लिया जाएगा.’ बता दें कि दिल्ली-लखनऊ रूट पर अभी कुल 53 ट्रेनें चलती हैं. इनमें से एक भी राजधानी नहीं है. खबर के मुताबिक इस रूट पर चलने वाली स्वर्ण शताब्दी का टिकट सबसे ज्यादा महंगा रहता है.

सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को निर्देश, घर खरीदारों के हित सुरक्षित रखने के लिए नीति बनाई जाए | बुधवार, 10 जुलाई 2019

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह बिल्डरों की परियोजनाओं में घर खरीदने वालों के हित सुरक्षित रखने के लिए एक नीति बनाए. अदालत ने कहा कि देश में ऐसे लाखों लोग हैं जिन्हें बिल्डरों ने वक्त पर घर नहीं दिया और जो अब परेशान हैं कि आगे क्या होगा. सुप्रीम कोर्ट का यह भी कहना था कि अब इन बिल्डरों पर कानूनी कार्रवाई के दौरान लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. केंद्र को जवाब देने के लिए 11 जुलाई तक का वक्त दिया गया है.

शीर्ष अदालत ने यह निर्देश जेपी इंफ्राटेक से घर खरीदने वालों लोगों की एक याचिका पर सुनाया. इस याचिका में अनुरोध किया गया था कि शीर्ष अदालत कंपनी के ‘लिक्विडेशन प्रोसेस’ में दखल देकर इसे रुकवाए. लिक्विडेशन प्रोसेस यानी एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें अगर कोई कंपनी एक तय समय सीमा के भीतर अपनी देनदारियां नहीं चुका पाती तो उसे बंद कर दिया जाता है और उसकी परिसंपत्तियां बकाएदारों में बांट दी जाती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया में तो दखल नहीं दे सकती, लेकिन घर खरीदारों की समस्या के समाधान के लिए कोई न कोई रास्ता निकालना जरूरी है.

इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर के घर पर सीबीआई का छापा | गुरुवार, 11 जुलाई 2019

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह और उनके पति आनंद ग्रोवर के घर पर सीबीआई ने छापा मारा. पीटीआई के मुताबिक यह कार्रवाई विदेशी फंडिंग के नियमों के उल्लंघन के मामले में की गई. इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर पर अपने एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ के लिए विदेशी फंडिंग हासिल करने को लेकर कानून के उल्लंघन का आरोप है.

आरोपों के मुताबिक 2006-07 से 2014-15 के बीच इस संगठन को 32.39 करोड़ रुपये का चंदा मिला था जिसमें विदेशी चंदा विनियमन कानून का उल्लंघन किया गया. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) इस सिलसिले में ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ के खिलाफ दो प्राथमिकियां दर्ज कर चुका है. इसे लेकर ‘लॉयर्स वॉइस’ नाम के एक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की है. इसमें ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ पर विदेशी चंदे का इस्तेमाल ‘देशविरोधी गतिविधियों’ के लिए करने का आरोप लगाया गया है. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए मई में सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा जयसिंह, आनंद ग्रोवर और उनके एनजीओ को नोटिस जारी किया था. संगठन इन आरोपों को खारिज कर चुका है.

पुलिस की अनदेखी और डॉक्टरों की लापरवाही से तबरेज अंसारी की मौत हुई थी | शुक्रवार, 12 जुलाई 2019

झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले में बीते महीने मॉब लिचिंग (भीड़ द्वारा हिंसा) का शिकार हुए तबरेज अंसारी की मौत पुलिस की अनदेखी और डॉक्टरों की लापरवाही से हुई थी. एनडीटीवी के मुताबिक यह बात इस मामले की जांच करने वाले दल ने कही. सब डिविजनल अधिकारी और जिला सिविल सर्जन के सदस्यों वाले इस दल का यह भी कहना है कि भीड़ द्वारा तबरेज अंसारी के ​साथ मारपीट किए जाने की सूचना पुलिस को मिल चुकी थी. फिर भी पुलिस देर से मौके पर पहुंची थी. इसके अलावा जिन डॉक्टरों ने उसका इलाज किया उन्होंने इस मामले को ‘गंभीरता’ से नहीं लिया.

इससे पहले बीती 18 जून को तबरेज अंसारी अपने दोस्तों के साथ कहीं जा रहे थे. उसी दौरान कुछ लोगों ने उन्हें मोटरसाइकिल चुराने के आरोप में पकड़ लिया था. इसके बाद भीड़ ने उनकी बेरहमी से पिटाई की साथ ही उन्हें ‘जय श्रीराम’ और ‘जय हनुमान’ बोलने के लिए भी मजबूर किया. बाद में इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ था. वहीं पुलिस को मामले की जानकारी मिलने के बाद उसने अंसारी को गिरफ्तार कर लिया था. गिरफ्तारी के चार दिन बाद जब उनकी हालत बिगड़ने लगी तो पुलिस ने उन्हें एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी मौत हो गई थी.

गोवा : कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए तीन विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली | शनिवार, 13 जुलाई 2019

बीते दिनों कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए गोवा के दस विधायकों में से तीन को राज्य कैबिनेट में जगह दी गई. विपक्ष के नेता रहे चंद्रकांत कावलेकर को गोवा का उप मुख्यमंत्री बनाया गया. वहीं जेनीफर मोनसेरात और फिलिप नेरी को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई. इनके अलावा गोवा विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष माइकल लोबो को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया. खबरों के मुातबिक इन चारों नेताओं को आज वहां की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.

इससे पहले शनिवार को ही गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने अपने मंत्रिमंडल के चार मंत्रियों को इस्तीफा देने के लिए कहा था. इनमें गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) के विजय सरदेसाई, विनोद पालेकर और जयेश सालगांवकर के अलावा रोहन खुंटे (निर्दलीय) शामिल हैं. वहीं गोवा मंत्रिमंडल में इस बड़े फेरबदल के बाद जीएफपी के नेता ने अपनी पार्टी को अब भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा बताया है. साथ ही कहा है, ‘भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं के साथ बातचीत के बाद जीएफपी गोवा सरकार का हिस्सा बनी थी. राज्य के मौजूदा भाजपा नेता उस समय हुई उस बातचीत का हिस्सा नहीं रहे थे.’

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