बीते रविवार को लॉर्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच हुए विश्व कप फाइनल के बेहद रोमांचक मुकाबले को बहुत सारे लोग क्रिकेट की जीत बता रहे हैं, लेकिन दरअसल वह क्रिकेट की हार है. इससे ज़्यादा बेतुकी और हास्यास्पद बात नहीं हो सकती कि किसी भी मैच का फ़ैसला इस आधार पर किया जाए कि उसमें कितने चौके-छक्के लगे. सुपर ओवर तक जो मैच क्रिकेट के खेल के सहारे चला, वह नतीजे में बिल्कुल तमाशा बन गया. आने वाले दिनों में अब हर टीम यह कोशिश करेगी कि उसके रन जितने भी बनें, उनमें बड़ा हिस्सा चौकों-छक्कों का हो. क्या पता, कल को किसी सुपर ओवर में जीत की यही कसौटी बन जाए.

दरअसल, इस नियम में क्रिकेट में जो ‘रन’ शब्द है, उसका ही महत्व खत्म कर दिया है. रन शब्द ही इसलिए बना कि वह दौड़ कर जुटाया जाता है. वैसे भी किसी मैच में एक या दो या तीन रन दौड़ कर जुटाने का भी अपना रोमांच है. रन आउट की गुंज़ाइश ऐसे ही मौक़ों पर बनती है, छक्के-चौकों के बीच नहीं.

मार्टिन गुप्टिल के एक शानदार थ्रो ने दो रन चुराने की कोशिश में लगे महेंद्र सिंह धोनी का विकेट ही नहीं उड़ाया, भारत के हाथ से सेमीफाइनल भी छीन लिया. खुद फाइनल में गुप्टिल दो रन के साथ जीत चुराने की कोशिश में आउट हुए और फिर भी टीम को बराबरी पर ले आए. अच्छी और सयानी टीमें एक-एक रन चुराने पर ज़ोर देती हैं. उन्हें मालूम होता है कि छक्के-चौके सहायक भूमिका की चीज़ हैं या फिर जब एक-एक रन लेते हुए आंख जम जाए, और इस खेल में गेंदबाज कुछ हताश हो जाए तो चौके-छक्कों की बारी आती है. लेकिन इस नियम ने अचानक रन का महत्व खत्म कर दिया. आप तमाशे की तरह चौके और छक्के लगाएं और इसके बाद विजेता बन जाएं.

पूछा जा सकता है कि किसी सुपर ओवर में अगर दो टीमों का स्कोर बराबर हो जाए तो फिर निर्णय किस आधार पर हो. इसका एक तार्किक जवाब तो यह है कि जिस टीम ने कम विकेट गवाए हों, उसे विजेता घोषित किया जाना चाहिए. आखिर क्रिकेट गेंद और बल्ले के संघर्ष का ही नाम है. इसमें रन बनाने और विकेट लेने की अहमियत है. अगर आप रन के मामले में बराबर हो जाते हैं, लेकिन अगर आपने विकेट बचाए रखे हैं तो आपको विजेता माना जाना चाहिए.

कल के खेल में भी अगर यही पैमाना होता तो न्यूजीलैंड जीतता क्योंकि न्यूजीलैंड ने आठ विकेट गंवाए थे, जबकि इंग्लैंड ऑल आउट हो चुका था. बेशक, आप यह पैमाना भी बना सकते हैं कि सुपर ओवर में किसी टीम ने कितने रन बनाए और कितने विकेट खोए. ऐसी हालत में इंग्लैंड जीत जाता क्योंकि उसने कोई विकेट नहीं खोया था. लेकिन अगर पूरे मैच और सुपर ओवर के रनों और विकेटों को जोड़कर देखा जाए- जो ज़्यादा उचित है क्योंकि सिर्फ़ सुपर ओवर को फ़ैसले करने का आधार बनाना ठीक नहीं- तब भी न्यूज़ीलैंड बाजी मार जाता.

कल हुआ क्रिकेट विश्व कप का फाइनल मैच दरअसल न्यूजीलैंड ने जीता था. उसे कम से कम एक और अवसर पर एक नियम की विडंबना का शिकार होना पड़ा, जब उसके आख़िरी ओवर की चौथी गेंद पर छह रन बन गए. इसे फिर भी खेल का हिस्सा माना जा सकता है. माना जा सकता है कि क्रिकेट जिन अनिश्चितताओं का खेल है उनमें कभी यह भी संभव है कि कोई गेंद किसी बल्लेबाज के शरीर से टकराकर सीमा पार कर जाए और बल्लेबाज को अतिरिक्त रन मिल जाएं.

लेकिन सुपर ओवर के बाद चौके-छक्कों के आधार पर मैच का फैसला करने का कोई तर्क नहीं बनता. इसके बाद तो अस्पष्ट तर्कों की गुंजाइश ज्यादा बनती है. कल्पना करें कि अगर दोनों टीमें चौकों में भी बराबर हो जाएं तो आप क्या करेंगे? क्या आप टीम के छक्कों के आधार पर फैसला करेंगे? और अगर छक्के भी बराबर हो जाएं तो आप क्या करेंगे? इस सवाल पर ट्विटर पर बहुत सारे मज़ाक चल पड़े हैं. हमारे एक मित्र फिरोज़ मुज़फ़्फ़र ने टिप्पणी की, ‘क्या आप इस बात पर फैसला करेंगे कि किस खिलाड़ी ने सुबह कितने अंडे खाए?’ लेखक और सांस्कृतिक कार्यकर्ता हिमांशु पंड्या ने ट्वीट किया है, ‘फ़ैसला तो इस बात से भी हो सकता है कि खिलाड़ी के बाएं गाल पर कितने तिल हैं?’

यह बेतुकी सी लगने वाली टिप्पणियां असल में नियम के बेतुकेपन को ही उजागर कर रही हैं. मामला यह नहीं है कि छक्के-चौके बराबर हो जाएं तो क्या होगा. यह सवाल दूसरी तरफ से भी पूछा जा सकता है कि अगर दोनों टीमों के स्कोर और विकेट दोनों बराबर हो जाएं, तब आप फैसला कैसे करेंगे. इसका सीधा जवाब है कि अंतिम विजेता खोजने की हड़बड़ी नहीं दिखाएंगे. कई खेलों में और क्रिकेट में भी कई बार साझा विजेता होते हैं. दोनों टीमों को चैंपियन घोषित किया जाता है. क्रिकेट में भी यह पहले कई बार हो चुका है कि दो-दो टीमें किसी टूर्नामेंट की चैंपियन घोषित की गईं.

कल के मैच का इकलौता तार्किक नतीजा यह था कि दोनों टीमों को विजेता घोषित कर दिया जाता. आखिर, दोनों ने फाइनल में शानदार जुझारूपन दिखाया था. अगर ऐसा होता तो पहली बार क्रिकेट विश्व कप को दो विजेता मिलते और क्रिकेट की शालीनता भी बची रहती. तब कह सकते थे कि क्रिकेट जीता है. अभी की स्थिति में तो क्रिकेट हार गया है.