धार्मिक गुरु और स्वयंभू संत आसाराम बापू को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उसकी एक जमानत याचिका खारिज कर दी. खबरों के मुताबिक आसाराम बापू ने यह याचिका यौन उत्पीड़न के एक मामले में राहत पाने के लिए लगाई थी. वहीं इस मामले में गुजरात सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि आरोपित के खिलाफ निचली अदालत में ट्रायल चल रहा है. साथ ही इस मामले में अभी 210 गवाहों की जांच होनी बाकी है. इस पर जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई वाली खंडपीठ ने जमानत याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया साथ ही यह भी कहा कि गुजरात हाईकोर्ट द्वारा की गई प्रथम दृष्टया टिप्पणियों से प्रभावित हुए बगैर निचली अदालत इस मामले का ट्रायल जारी रखे.

गुजरात के सूरत में रहने वाली दो बहनों ने आसाराम और उसके बेटे नारायण स्वामी के खिलाफ बलात्कार और गैरकानूनी ढंग से कैद में रखने सहित अलग-अलग कुछ दूसरे मामले भी दर्ज कराए हैं. इधर, आसाराम बापू एक नाबालिग के साथ बलात्कार के मामले में पहले ही उम्रकैद की सजा काट रहा है. फिलहाल उसे राजस्थान की एक जेल में रखा गया है. वहीं उम्रकैद की सजा में राहत पाने के लिए उसने पहले भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी. तब आसाराम ने उस याचिका में अपनी उम्र का हवाला दिया था. लेकिन उस याचिका को भी शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था.