नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा पंजाब के मुख्यमंत्री को कैबिनेट मंत्री के पद से अपना त्यागपत्र भेजे जाने के बाद अमरिंदर सिंह ने कहा कि मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद जिस तरह अन्य मंत्रियों ने अपने नये विभाग का कामकाज संभाल लिया, उसी तरह सिद्धू को भी अपने नये विभाग का कार्यभार संभाल लेना चाहिए था. उन्होंने कहा कि अगर सिद्धू अपना काम नहीं करना चाहते तो मैं कुछ नहीं कर सकता.

अपने फैसले को सार्वजनिक करने के अगले दिन नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा अपना त्यागपत्र उन्हें भेजने के विषय पर अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने अब तक सिद्धू के त्यागपत्र को पढ़ा नहीं है और चंडीगढ़ लौटने के बाद ही वह उसे पढ़ेंगे. उन्होंने कहा, ‘यह सरकार के लिए कोई परेशानी वाली बात नहीं है. लेकिन संगठन में कुछ अनुशासन तो हो ही, अपने मंत्रियों के कामकाज को देखने के बाद ही मुझे जो व्यक्ति जिस काम के लिए अच्छा जान पड़ा, मैंने उनके विभागों में फेरबदल किया और उन्हें वह काम सौंपा.’

सिद्धू को बिजली विभाग दिये जाने के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मैंने सोचा कि बिजली पंजाब के लिए महत्वपूर्ण चीज है, यह सबसे महत्वपूर्ण चीजों में एक है, इसलिए मैंने बिजली विभाग सिद्धू को दिया, लेकिन वह यह विभाग नहीं चाहते हैं.’ उन्होंने कहा कि सिद्धू को पहले तो बिजली विभाग का कार्यभार संभाल लेना चाहिए था तथा यदि बाद में वह महसूस करते कि उन्हें कोई और विभाग चाहिए तो फिर उस पर भविष्य में विचार किया जा सकता था. मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा, ‘यह तो ऐसा हुआ कि कोई जनरल कहे कि मैं लद्दाख तैनाती पर नहीं जा रहा , मुझे मणिपुर भेजा जाए. आप ऐसा कैसे कह सकते हैं? आपको जो कहा गया है, आपको करना होगा.’

जब अमरिंदर सिंह से पूछा गया कि अब तो उन्हें सिद्धू से मुक्ति मिल गयी तो क्या वह खुश हैं तो उन्होंने कहा, ‘मुझे क्यों खुश होना चाहिए? मैं किसी के जाने से खुश नहीं हूं.’ मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर की लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारी का विरोध नहीं किया, बल्कि उन्होंने सुझाव दिया था कि उन्हें बठिंडा से चुनाव लड़ना चाहिए जिसे इस दंपती ने अस्वीकार कर दिया.