बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्रिकेट मैचों के दौरान होने वाले ध्वनि प्रदूषण के लिए जुर्माना लगाने की मांग करने वाली एक याचिका खारिज कर दी है. हाई कोर्ट ने कहा कि क्रिकेट के मैच के दौरान लोगों का जोश में आना बनता है. एक अधिवक्ता द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया था कि 2013 में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मैचों के दौरान मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम और पुणे के सुब्रत राय सहारा स्टेडियम में ध्वनि प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन हुआ था. याचिकाकर्ता का कहना था कि 10 बजे के बाद भी लाउडस्पीकर पर संगीत बजाया जा रहा था.

याचिका में इसके लिए बीसीसीआई और महाराष्ट्र क्रिकेट संघ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई थी. इस पर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति एन एम जामदार की खंडपीठ ने कहा कि क्रिकेट मैच के दौरान जब खिलाड़ी चौका या छक्का लगाता है या विकेट गिरता है तो लोगों का चिल्लाना और शोर मचाना बनता है. मुख्य न्यायाधीश नंदराजोग ने कहा, ‘समाज को थोड़ी मौज-मस्ती और मनोरंजन का हक है. लोगों को लुत्फ उठाने दीजिए.’

अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी नोटिस किया कि याचिकाकर्ता का घर खेल स्थल से करीब 40 किलोमीटर दूर है. इस पर उसने पूछा कि याचिकाकर्ता इतनी दूर रहने के बावजूद इस शोर से कैसे प्रभावित हुआ. हाई कोर्ट का कहना था, ‘स्टेडियम के आसपास रहने वाले लोगों में से किसी ने भी शोर की शिकायत नहीं की.’