केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि अगर आपको अच्छी सेवाएं चाहिए तो उसकी कीमत भी चुकानी पड़ेगी क्योंकि सरकार के पास पैसा नहीं है. केंद्रीय मंत्री ने यह बात लोकसभा में अपने ही मंत्रालय को लेकर हुई चर्चा के दौरान पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कही. खबरों के मुताबिक कुछ सदस्यों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में सड़कों पर टोल से जुटाई गई रकम को लेकर सवाल किए थे.

इस पर नितिन गडकरी ने कहा, ‘टोल हमेशा के लिए बंद नहीं हो सकता, कम या ज्यादा जरूर हो सकता है.’ इस मौके पर उन्होंने खुद को टोल का जन्मदाता भी बताया. साथ ही कहा, ‘बीते पांच साल के दौरान सरकार ने 40 हजार किलोमीटर हाईवे का निर्माण किया है. जिन जगहों पर टोल लगाया गया है वहां के लोगों के पास उसे चुकाने की क्षमता है. साथ ही उस टोल से प्राप्त रकम का इस्तेमाल ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों की सड़कों के निर्माण पर किया जा रहा है.’

नितिन गडकरी ने आगे कहा, ‘सड़क परिवहन मंत्रालय देश में ग्रीन एक्सप्रेस-वे योजना पर भी काम कर रहा है. ऐसी ही एक परियोजना दिल्ली-मुंबई के बीच भी तैयार की जाएगी. इसके बनने के बाद दिल्ली और मुंबई के बीच की दूरी 12 घंटे में तय हो सकेगी.’ इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘यह एक्सप्रेस-वे हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के आदिवासी और पिछड़े इलाकों से होकर गुजरेगा. इससे इसके लिए जमीन के अधिग्रहण में भी 16 हजार करोड़ रुपये की बचत होगी.’

सदन को जानकारी देते हुए नितिन गडकरी ने यह भी कहा कि 2014 में उन्होंने जब मंत्रालय संभाला था तो उस वक्त 3.85 लाख करोड़ रुपये की 403 परियोजनाएं बंद पड़ी थीं. लेकिन मोदी सरकार ने इन पर काम शुरू करवाया. अब 90 फीसदी योजनाएं आगे बढ़ रही हैं. इससे बैंकों को भी तीन लाख करोड़ रुपये के नॉन परफॉरमिंग एसेट (एनपीए) के तौर पर फायदा हुआ है. गडकरी के मुताबिक उनके मंत्रालय ने जिम्मेदारी और पारदिर्शिता के साथ काम को आगे बढ़ाया जिससे उस पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा.