प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को संसद में अपने मंत्रियों की गैरहाजिरी पर नाराजगी जाहिर की. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. उन्होंने भाजपा के संसदीय दल के साथ हुई एक बैठक में ऐसे मंत्रियों की सूची भी मांगी है. इससे पहले भी इसी महीने हुई एक बैठक में नरेंद्र मोदी ने संसद न आने वाले सांसदों को फटकार लगाई थी. इसके अलावा भाजपा ने स्वंतत्र देव सिंह को उत्तर प्रदेश राज्य पार्टी इकाई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है. यह खबर भी अखबारों की प्रमुख सुर्खियों में है. उन्होंने महेंद्र नाथ पांडेय की जगह ली है. महेंद्र नाथ पांडेय को मोदी सरकार में शामिल किया गया था, जिसके चलते यह पद खाली था.

दिल्ली स्थित एम्स में मरीजों के कैफेटेरिया पर डॉक्टरों-कर्मचारियों का कब्जा

दिल्ली स्थित एम्स ने देशभर से आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को कैफेटेरिया में सस्ते दाम पर भोजन का निवाला उपलब्ध कराकर वापस छीन लिया है. दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों और कर्मचारियों की शिकायत के बाद नवनिर्मित तीन मंजिला कैफेटेरिया में इनके जाने पर रोक लगा दी गई है. साथ ही, अब इस कैफेटेरिया को पब्लिक की जगह कर्मचारियों का कैफेटेरिया घोषित कर दिया गया है. बताया जाता है कि इस कैफेटेरिया को बनाने में करोड़ों रुपये की लागत आई है. लेकिन केवल पांच हजार रुपये महीने के किराये पर इसके संचालन का जिम्मा निजी कंपनी को दे दिया गया. इस बारे में अस्पताल प्रशासन का कहना था कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि ओपीडी में पहुंचे मरीज और तीमारदारों को भी सस्ते दाम पर स्वादिष्ट भोजन मिल सके.

उधर, एम्स के उप निदेशक (प्रशानिक) शुभाशीष पांडा ने इस फैसले के बारे में कहा, ‘डॉक्टरों और कर्मचारियों ने आपत्ति जताई थी कि मरीजों-तीमारदारों के पहुंचने से कैफेटेरिया में भीड़ बढ़ जाती है. इसके चलते उन्हें परेशानी होती है.’ मौजूदा समय में एम्स में पांच कैफेटेरिया हैं. लेकिन, ये सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए ही हैं. इसके अलावा इनके लिए हॉस्टल में भी मेस है. वहीं, मरीजों और उनके तीमारदारों को खाने के लिए दो छोटे कैंटीनों और अस्पताल परिसर से बाहर की दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता है.

आयातित खाद्य तेलों के चलते घरेलू सरसों तेल उद्योग पर संकट

देश में भारी मात्रा में खाद्य तेल आयात होने से घरेलू सरसों तेल उद्योग की कमर टूट गई है. राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित खबर के मुताबिक इसके चलते राजस्थान की 40 फीसदी सरसों तेल इकाइयां बंद हो गई हैं. जो मिलें चल भी रही हैं, उनका उत्पादन पहले की तुलना में काफी कम हो गया है. मस्टर्ड ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. इसमें प्रधानमंत्री से मांग की गई है कि सरसों तेल उद्योग को बचाना है तो आयातित तेलों पर तत्काल रोक लगाई जाए या फिर आयात शुल्क बढ़ाया जाए. बताया जाता है कि विदेशों से प्रति माह 13 लाख टन खाद्य तेलों का आयात हो रहा है. इनमें अधिक हिस्सा पामोलीन तेल का है जो घरेलू तेलों के मुकाबले 30 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता है.

उन्मादी भीड़ की हिंसा के खिलाफ कोई नया कानून नहीं

केंद्र सरकार उन्मादी भीड़ की हिंसा के खिलाफ कोई नया कानून बनाने के पक्ष में नहीं है. हिन्दुस्तान ने गृह मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के हवाले से कहा है कि ऐसी किसी सिफारिश पर विचार नहीं किया जा रहा है. केंद्र सरकार का मानना है कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त कानून हैं और राज्यों को इस संबंध में सख्ती से पेश आना चाहिए. फिलहाल, गृह मंत्रालय राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा कर रहा है. इससे पहले मोदी सरकार-1 में इस तरह की हिंसा पर एक मंत्री समूह गठित किया गया था. साथ ही, गृह सचिव की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई गई थी. बताया जाता है कि इनकी रिपोर्ट को सरकार ने सार्वजनिक नहीं किया है.

मोदी सरकार-1 के दौरान 14,800 एनजीओ बंद

मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल के दौरान 14,800 एनजीओ के पंजीकरण रद्द कर दिए गए. अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसकी जानकारी लोकसभा में दी. उन्होंने एक सवाल के जवाब में सदन को बताया, ‘इन्होंने (एनजीओ) विदेशों से काफी चंदे हासिल किए थे. ये विदेशी चंदा नियामक अधिनियम कानून का उल्लंघन कर रहे थे.’ नित्यानंद राय ने आगे बताया कि अलग-अलग एनजीओ को साल 2017-18 में 16,895 करोड़ रुपये चंदे से हासिल हुए थे. इससे पहले साल 2016-17 में यह आंकड़ा 15,343 और 2015-16 में 17,803 करोड़ रुपये रहा था.

फाइनल में कोई भी टीम नहीं हारी लेकिन, खिताब तो एक टीम को देना था : विलियमसन

क्रिकेट विश्व कप -2019 के नतीजे को लेकर न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन ने बड़ा बयान दिया है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक उन्होंने मंगलवार को कहा, ‘फाइनल में कोई भी टीम नहीं हारी लेकिन, खिताब तो एक टीम को देना था.’ कीवी क्रिकेटर ने आगे आईसीसी के नियम पर सवाल उठाने से इनकार कर दिया. केन विलियमसन ने कहा, ‘टूर्नामेंट के नियमों की जानकारी पहले से सभी को थी. नियम तो नियम होते हैं और ये शुरुआत से हैं. किसी ने सोचा नहीं होगा कि इस तरह का मैच होगा. यह शानदार मैच था और सभी ने इसका मजा लिया.’ हालांकि, न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम के कोच गैरी स्टीड ने इन नियमों की समीक्षा की मांग की है. उन्होंने कहा, ‘आईसीसी को खिताब बांटने के विकल्प के बारे में सोचना होगा.’