अमेरिका में लंबे समय से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीयों के लिए पिछले दिनों राहत की खबर आई. अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने प्रत्येक देश को ग्रीन कार्ड जारी करने की मौजूदा सात फीसदी की सीमा हटाने के लिए मंजूरी दे दी. इसे लेकर पास हुए विधेयक में प्रत्येक देश के लिए ‘परिवार आधारित ग्रीन कार्ड’ जारी करने की सालाना सीमा को सात फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है. साथ ही रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए सात फीसदी की सीमा को पूरी तरह हटा दिया गया. ‘फेयरनेस ऑफ हाई स्किल्ड इमिग्रेंट्स एक्ट-2019’ या ‘एचआर 1044’ नाम के नए विधेयक में यह भी कहा गया है कि अब रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड ‘पहले आओ पहले पाओ’ की नीति के तहत बांटे जाएंगे.
ग्रीन कार्ड क्या है
ग्रीन कार्ड किसी व्यक्ति को अमेरिका में स्थायी तौर पर रहने और काम करने की इजाजत देता है. अमेरिका में तीन साल से ज्यादा का समय बिता चुके लोग इसके लिए आवेदन कर सकते हैं. अमेरिकी सरकार हर साल करीब 11 लाख ग्रीन कार्ड जारी करती है. इसमें से रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की संख्या महज 1,40,000 है, जिनके लिए अमेरिका में अस्थाई तौर पर काम कर रहे प्रवासी पेशेवर आवेदन कर सकते हैं. रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए हर साल करीब दस लाख प्रवासी पेशेवर आवेदन देते हैं. अब तक के नियम के तहत हर देश का सात फीसदी कोटा बना हुआ है.
अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड को पांच श्रेणियों में बांटा गया है. पहली श्रेणी ईबी-1 है, जिसमें सबसे उच्च कौशल वाले प्रवासी पेशेवर जैसे - उत्कृष्ट प्रोफेसर, शोधकर्ता और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रबंधक और अधिकारी आते हैं. दूसरी श्रेणी ईबी-2 है, जिसमें उच्च डिग्री धारी या असाधारण कामगार आते हैं. श्रेणी ईबी-3 में कुशल कामगार एवं श्रमिक और ईबी-4 में विशेष प्रवासी जैसे - धार्मिक कार्यकर्ता और विशेष युवा अप्रवासी आते हैं. रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की ईबी-5 श्रेणी में प्रवासी निवेशक को रखा गया है.
नए विधेयक में क्या कहा गया है
नए विधेयक की बात करें तो इसमें तीन साल के ट्रांजिशन पीरियड का प्रस्ताव दिया गया है. इस ट्रांजिशन पीरियड के पहले साल में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की दो श्रेणियों ईबी-2 और ईबी-3 का 10 फीसदी हिस्सा और उसके अगले दो सालों में 15 फीसदी हिस्सा भारत और चीन को छोड़कर बाकी देशों के लिए आरक्षित होगा. नए विधेयक के मुताबिक इन तीन सालों में इस आरक्षित हिस्से को छोड़कर बाकी (पांचों श्रेणियों को मिलाकर) बचे हुए कुल ग्रीन कार्ड का 85 फीसदी तक हिस्सा किसी एक देश के प्रवासियों को आवंटित किया जा सकता है. इसका मतलब यह है कि भारत, चीन या किसी अन्य देश के प्रवासी अगले तीन सालों तक अनारक्षित ग्रीन कार्ड में से 85 फीसदी तक ग्रीन कार्ड हासिल कर सकते हैं.
इतनी बड़ी संख्या में ग्रीन कार्ड आवंटित करने की वजह
नए बिल में सात फीसदी की सीमा को पूरी तरह हटाए जाने और किसी एक देश को इतनी बड़ी संख्या में ग्रीन कार्ड देने के पीछे की वजह भी बताई जा रही है. इस बिल का समर्थन कर रहे अमेरिकी सांसदों का कहना है कि इससे उच्च कौशल वाले उन ग्रीन कार्ड आवेदकों की परेशानी दूर हो जाएगी जिनके देश से सबसे ज्यादा आवेदन आते हैं और आवेदकों की संख्या बहुत ज्यादा होने के चलते वे दशकों से ग्रीन कार्ड के लिए इंतजार कर रहे हैं. इस बिल में ऐसा प्रावधान भी किया गया है जिससे ईबी-1 कैटेगरी यानी सबसे उच्च कौशल वाले प्रवासी पेशेवरों को सबसे पहले ग्रीन कार्ड मिल सकें. अमेरिकी सांसदों के मुताबिक नया कानून आने के बाद उच्च कौशल वाले प्रवासी पेशेवरों को जल्दी ग्रीन कार्ड मिल जाएंगे जिससे अमेरिकी कंपनियों और वहां की अर्थवयवस्था को ही फायदा होगा.
Pleased the House passed legislation I cosponsored to help address our broken immigration system. The "Fairness for High-Skilled Immigrants Act" (H.R. 1044) will remove per-country limits for employment-based immigrants, helping more highly skilled immigrants get visas faster.
— André Carson (@RepAndreCarson) July 10, 2019
Proud to be an original cosponsor of HR1044 which will help address the backlog of employment-based immigrant visas for highly-skilled and highly-educated professionals that contribute to US communities and economies.
— Rep. Dan Newhouse (@RepNewhouse) July 10, 2019
कैसे नया कानून भारतीय प्रवासियों के लिए बड़ी सौगात लाया है?
अमेरिका में हर देश के प्रवासियों को सात फीसदी ग्रीन कार्ड ही आवंटित किए जाने से सबसे ज्यादा परेशानी भारतीयों को होती थी. एक अध्ययन के मुताबिक हर साल ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वालों में 75 फीसदी से ज्यादा भारतीय प्रवासी होते हैं. लेकिन इनमें से पांच फीसदी को भी ग्रीन कार्ड नहीं मिल पाता. इसी अध्ययन के मुताबिक भारतीय आईटी पेशेवरों को ग्रीन कार्ड के लिए औसतन 70 साल तक का इंतजार करना पड़ता है. अप्रैल 2018 में आई एक रिपोर्ट की मानें तो इस समय छह लाख से ज्यादा भारतीय प्रवासी आवेदन करने के बाद ग्रीन कार्ड मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

अमेरिका में ग्रीन कार्ड से जुड़े कानून में बदलाव की मांग करने वाले लोगों का कहना था कि हर देश के लिए बराबरी का सात फीसदी का कोटा सही नहीं है. इससे भारत और चीन जैसे ज्यादा जनसंख्या वाले देशों के लोगों के साथ न्याय नहीं हो पाता. उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो यूरोपीय देश आईसलैंड की जनसंख्या महज तीन लाख 38 हजार है और भारत की एक अरब से ज्यादा, लेकिन दोनों देशों को हर साल एक बराबर ग्रीन कार्ड ही आवंटित किए जाते हैं. पुराने कानून का विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि ज्यादा जनसंख्या वाले देशों के लिए ग्रीन कार्ड का कोटा बढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि इन देशों से बहुत ज्यादा लोग आवेदन करते हैं.
आईटी कंपनियों का बड़ा सिरदर्द भी कम होगा
अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए सात फीसदी की सीमा को पूरी तरह हटाए जाने का सबसे ज्यादा फायदा उच्च कौशल वाले भारतीय पेशेवरों को मिलेगा. इन लोगों को अमेरिका में काम करने के लिए अस्थायी एच1-बी वीजा की जरूरत होती है. लेकिन, डोनाल्ड ट्रंप की ‘बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन’ (अमेरिकी उत्पाद खरीदो, अमेरिकियों को नौकरी दो) नीति ने इन लोगों के सामने कई कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. इस नीति के बाद से भारतीय आईटी कंपनियों के लिए एच1-बी वीजा खारिज होने की दर 20-40 फीसदी हो गयी है. साथ ही भारतीयों को वीजा न मिलने के चलते तकनीक से जुड़ी अमेरिकी कंपनियां भी खासा परेशान थीं. अमेरिका में 2016 सेंसस के आंकड़ों पर आधारित एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर की तकनीक का केंद्र माने जाने वाले कैलिफोर्निया के सिलिकॉन वैली की कंपनियों में 70 फीसदी से ज्यादा कर्मचारी विदेशी हैं और इनमें भी सबसे ज्यादा भारतीय हैं.
ऐसे में जाहिर है कि रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की सीमा समाप्त होने और ज्यादा भारतीय पेशेवरों को ग्रीन कार्ड मिलने से इन कंपनियों का बड़ा सिरदर्द भी कम होगा. शीर्ष अमेरिकी आईटी कंपनियों ने प्रतिनिधि सभा में यह बिल पास होने के बाद इसकी जमकर सराहना की है.
माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष ब्रैड स्मिथ ने प्रतिनिधि सभा में इस बिल के पास होने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘आज अमेरिकी संसद के निचले सदन ने एक बिल पास किया जिसका उद्देश्य ग्रीन कार्ड आवंटन की प्रक्रिया में सभी देशों के लोगों से समान व्यवहार सुनिश्चित करना है. यह बिल एक निष्पक्ष उच्च-कुशल आव्रजन प्रणाली को बढ़ावा देता है, जो व्यापार और हमारी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है.’
Today the U.S. House passed legislation to ensure people from all countries are treated the same in the green card process. This promotes a fair high-skilled immigration system that’s good for business and our economy. #HR1044
— Brad Smith (@BradSmi) July 10, 2019
दिग्गज अमेरिकी कंपनी एमेजॉन ने इस बिल को संसद में पेश करने वाली डेमोक्रेटिक सांसद जो लोफग्रेन को बधाई देते हुए ट्वीट किया है, ‘फेयरनेस ऑफ हाई स्किल्ड इमिग्रेंट्स एक्ट-2019 का समर्थन करने के लिए इस बिल की मुख्य प्रस्तावक जो लोफग्रेन और 311 अन्य प्रस्तावकों को धन्यवाद.’
Thank you to @RepZoeLofgren and the 311 House cosponsors for supporting the Fairness for High-Skilled Immigrants Act. #HR1044
— Amazon Policy (@amazon_policy) July 10, 2019
अब आगे क्या होगा?
435 सदस्यों वाले अमेरिकी संसद के निचले सदन-प्रतिनिधि सभा ने बीते हफ्ते इस बिल को 65 के मुकाबले 365 मतों से पास किया. अभी इस बिल को कानून में बदलने के लिए उच्च सदन यानी सीनेट और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हरी झंडी मिलने की जरूरत है. जानकारों की मानें तो यह बिल सीनेट में भी आराम से पास हो जाएगा क्योंकि डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के ही सांसद इसके पक्ष में हैं. उम्मीद यह भी जताई जा रही है कि डोनाल्ड ट्रंप भी इसमें कोई रुकावट नहीं डालेंगे क्योंकि एक तो पिछले दिनों उन्होंने खुद उच्च कौशल वाले प्रवासी पेशेवरों को स्थायी नागरिकता देने की वकालत की थी और दूसरा अमेरिका की बड़ी आईटी कंपनियों के प्रमुखों ने भी ट्रंप से इस बिल का समर्थन करने की अपील की है.
फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर हमसे जुड़ें | सत्याग्रह एप डाउनलोड करें
Respond to this article with a post
Share your perspective on this article with a post on ScrollStack, and send it to your followers.