कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार को आज बड़ा इम्तहान देना है. राज्य में कई हफ्ते से चल रही सियासी उठापटक के बीच मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के सामने सदन में बहुमत हासिल करने की चुनौती है. पूरे देश के निगाहें आज कर्नाटक पर लगी हैं.

225 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में वैसे तो बहुमत का आंकड़ा 113 है लेकिन, कांग्रेस और जेडीएस के 16 विधायकों सहित कुल 18 विधायकों की बगावत के बाद तस्वीर बदल गई है. कल सुप्रीम कोर्ट ने इनमें से 15 बागी विधायकों की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि वे सदन की कार्रवाई में हिस्सा लेने के लिए बाध्य नहीं हैं. तो अगर ये 15 विधायक विश्वासमत के दौरान गायब रहे तो सामान्य बहुमत हासिल करने के लिए जरूरी संख्या घटकर 106 पर पहुंच जाएगी.

कांग्रेस और जेडीएस के कुल विधायकों की संख्या, अध्यक्ष और एक मनोनीत विधायक को शामिल करने के बाद गठबंधन सरकार के पास 102 विधायकों का समर्थन है. हालांकि अध्यक्ष तभी वोट डाल सकता है जब दोनों तरफ बराबर वोट पड़ें. यानी सरकार बचने के लिए यह जरूरी होगा कि कम से कम चार बागी उसके खेमे में लौट आएं.

उधर, भाजपा के पास कुल 105 विधायक हैं. यानी बागी विधायकों के सदन से बाहर रहने की सूरत में उसे कुमारस्वामी की सरकार को गिराने के लिए सिर्फ एक विधायक का समर्थन चाहिए होगा. दो निर्दलीय विधायकों (एच नागेश और आर शंकर) ने पहले ही भाजपा को समर्थन दे दिया है.