इन दिनों लोगों को उनके बुढ़ापे की तस्वीर दिखाने वाले फेसएप का खुमार छाया हुआ है. मशहूर हस्तियों से लेकर आम लोगों तक हर कोई इससे बनाई गई तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहा है. एक रूसी कंपनी वाइयरलैस लैब द्वारा बनाया गया फेसएप किसी शख्स के बुढ़ापे की संभावित तस्वीर बनाने के लिए आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस और न्यूरल इंजन नाम की एक तकनीक का इस्तेमाल करता है. इसके नतीजों ने पूरी दुनिया को हैरान और रोमांचित कर रखा है.
लेकिन क्या इसका कोई नकारात्मक पक्ष भी है? क्या लोगों को फेसएप से सावधान रहने की जरूरत है? कइयों के मुताबिक फेसएप न सिर्फ यूजर का चेहरा इस्तेमाल करता है बल्कि उसकी निजी जानकारियों तक भी पहुंच हासिल कर लेता है. इसकी सेवा शर्तों में साफ कहा गया है, ‘ मैं इसे अपनी फोटोज और दूसरी सामग्री को इस्तेमाल और संपादित करने के साथ इसके प्रकाशन की भी इजाजत देता हूं जिसके लिए मैं किसी रॉयल्टी का दावा नहीं करूंगा.’ इन शर्तों में एक यह भी है कि कंपनी के पास ये जानकारियां अपने किसी कारोबारी सहयोगी के साथ साझा करने का अधिकार भी है.
यानी फेसएप को आप सिर्फ एक फोटो ही नहीं बल्कि बहुत कुछ दे रहे हैं. आपको लग सकता है कि आपकी तस्वीर का निजी इस्तेमाल हो रहा है लेकिन बाद में इसका सार्वजनिक इस्तेमाल भी किया जा सकता है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक कई लोगों ने यह भी दावा किया है कि ऐप खोलते ही इंटरनेट पर सारी तस्वीरें अपलोड होने लगीं. हालांकि आईओएस और आईफ़ोन में यह विकल्प आता है कि किन तस्वीरों को फेसएप को हैंडओवर करना चाह रहे हैं और किन तस्वीरों को नहीं.
फेसऐप को लेकर अमरीकी संसद में भी चिंता है. उसके एक सदस्य चक शुमर ने फेसएप की जांच की मांग की है. ट्विटर पर पोस्ट किए एक पत्र में उन्होंने लिखा है, ‘यह बहुत ही फिक्र की बात है. विदेशी शक्तियां अमेरिकी नागरिकों की निजी जानकारियां हासिल कर रही हैं.’
BIG: Share if you used #FaceApp:
— Chuck Schumer (@SenSchumer) July 18, 2019
The @FBI & @FTC must look into the national security & privacy risks now
Because millions of Americans have used it
It’s owned by a Russia-based company
And users are required to provide full, irrevocable access to their personal photos & data pic.twitter.com/cejLLwBQcr
हालांकि सुरक्षा से जुड़ी इन तमाम चिंताओं को कंपनी ने सिरे से ख़ारिज कर दिया है. फेसएप का कहना है कि लोगों की तस्वीरें स्थायी रूप से स्टोर नहीं की जा रही हैं और न ही लोगों के पर्सनल डेटा में सेंध लगाई की जा रही है. कंपनी का कहना है कि यूजर्स जिन तस्वीरों को चुन रहे हैं उन्हीं की एडिटिंग की जा रही है.
वैसे यह पहली बार नहीं है जब फेसएप विवादों में घिरा हो. 2017 में उसने एप में एथनिसिटी फिल्टर दिया था जिसमें यूजर अपनी नस्ल बदल सकता था. यानी एशियाई मूल वाला शख्स देख सकता था कि अगर वह अफ्रीकी होता तो कैसा दिखता. हालांकि इसकी आलोचना के बाद कंपनी ने माफी मांगते हुए उस फीचर को वापस ले लिया था.
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