आईएलएफएस प्रबंधन ने अपनी रेटिंग बेहतर कराने के लिए रेटिंग एजेंसियों के बड़े अधिकारियों एवं प्रबंधकों और उनके परिवार के सदस्यों को रीयल मैड्रिड फुटबाल मैच की टिकटें और लक्जरी विला पर भारी छूट जैसे कई तोहफे दिए. आईएलएफएस घोटाले से जुड़ी जांच में यह बात सामने आयी है.

सरकार द्वारा नियुक्त आईएलएफएस के नए निदेशक मंडल ने ग्रांट थॉंर्टन को कंपनी के फॉरेंसिक ऑडिट का काम सौंपा है. इस जांच में समूह द्वारा करीब 90,000 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान में असफल रहने और समूह के पिछले शीर्ष प्रबंधन द्वारा संदिग्ध तौर पर गलत काम करने की पहचान हुई है. अंतरिम फॉरेंसिक ऑडिट रपट में रेटिंग एजेंसियों की भूमिका पर चर्चा की गयी है. ग्रांट थॉर्टन ने कई ऐसे मामलों का जिक्र किया है, जब कंपनी के प्रबंधन ने रेटिंग एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों को कई तरह के तोहफे और लाभ दिए.

जांच में सितंबर 2012 से अगस्त 2016 के बीच इस संबंध में हुए कई ईमेल का भी जिक्र किया है. आईएलएफएस समूह को रेटिंग देने वालों में केयर, इक्रा, इंडिया रेटिंग्स और ब्रिकवर्क एजेंसियां प्रमुख हैं. इसमें पाया गया कि आईएलएफएस फाइनेंशियल सर्विसेस (आईएफआईएन) के पूर्व मुख्य कार्यकारी रमेश बावा ने फिच रेटिंग्स के दक्षिण एवं दक्षिण एशिया के संस्थान प्रमुख अंबरीश श्रीवास्तव की पत्नी को एक विला खरीदने में मदद की. कंपनी के एक और मेल में पाया गया कि ब्रिकवर्क रेटिंग्स के संस्थापक और निदेशक डी. रविशंकर ने अरुणा साहा को धन्यवाद भेजा है. साहा उस समय आईएफआईएन के संयुक्त निदेशक थे. साहा ने रविशंकर को उनके बेटे के लिए स्पेन में रीयल मैड्रिड का फुटबाल मैच देखने के लिए टिकट उपलब्ध कराए थे. एक और ई मेल में साहा आईएलएफएस के मुख्य जोखिम अधिकारी सुजॉय दास से केयर के प्रबंध निदेशक राजेश मोकाशी के लिए उनकी पसंद का फिटबिट बैंड खरीदने के लिए कह रहे हैं.