बीते बुधवार को उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में हुए गोलीकांड में मारे गए लोगों के परिजनों से मुलाकात करने गईं कांग्रेस महासचिव ने रात मिर्जापुर स्थित चुनार गेस्ट हाउस में काटी. मिर्जापुर प्रशासन ने उनसे धारा 144 का हवाला देते हुए सोनभद्र न जाने का अनुरोध किया था. लेकिन प्रियंका गांधी ने उन्हें जवाब दिया कि वे अकेली ही सोनभद्र जाकर पीड़ितों से मिलने के लिए तैयार हैं और ऐसे में निषेधाज्ञा का जरा भी उल्लंघन नहीं होगा. इसकी इजाजत न मिलने पर प्रियंका गांधी धरने पर बैठ गईं जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया. सोनभद्र में जमीन के एक विवाद को लेकर दो पक्षों में हुए संघर्ष में 10 लोगों की मौत हो गई थी.

पीटीआई के मुताबिक प्रियंका गांधी और अधिकारियों के बीच रात करीब 12:00 बजे से 1:15 बजे तक चली दूसरे दौर की बातचीत भी नाकाम रही. कांग्रेस नेता और उनके सैकड़ों समर्थक चुनार गेस्ट हाउस में ही डटे रहे. देर रात किए गए सिलसिलेवार ट्वीटों में प्रियंका गांधी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी जोन के अपर पुलिस महानिदेशक बृजभूषण, वाराणसी के मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल और पुलिस उपमहानिरीक्षक को उन्हें यह कहने के लिए भेजा कि वे पीड़ितों से मिले बगैर वापस चली जाएं. उनका कहना था, ‘न मुझे हिरासत में रखने का आधार बताया गया है और न ही कोई कागज दिए गए.’

एक और ट्वीट में प्रियंका गांधी ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी हर तरह से गैरकानूनी है. उनका कहना था, ‘मैंने स्पष्ट कर दिया है कि मैं किसी धारा का उल्लंघन करने नहीं बल्कि पीड़ितों से मिलने आई हूं. मैंने सरकार के दूतों से कहा है कि मैं उनसे मिले बगैर वापस नहीं जाऊंगी.’ प्रियंका ने एक वीडियो भी ट्वीट किया है जिसमें वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी रात करीब 1:15 बजे उनसे बैठक बेनतीजा खत्म होने के बाद वापस जाते दिख रहे हैं.

प्रियंका गांधी और अन्य समर्थकों के साथ चुनार गेस्ट हाउस में मौजूद कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने शनिवार को पीटीआई को बताया कि सरकार बिजली और पानी की आपूर्ति बंद करके उन्हें गेस्ट हाउस छोड़ने पर मजबूर कर रही है, लेकिन उनके कदम पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने बताया कि पूरी रात बिजली नहीं आई. अजय कुमार का कहना था, ‘सरकार ने गेस्ट हाउस में जलपान का कोई इंतजाम नहीं किया. स्थानीय नागरिक और पार्टी कार्यकर्ता ही कुछ प्रबंध कर रहे हैं.’