न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच खेले गये आईसीसी विश्व कप के फाइनल में हुए ‘ओवरथ्रो’ विवाद के बाद क्रिकेट कानूनों का संरक्षक मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) इस नियम की समीक्षा कर सकता है. ‘द संडे टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक एमसीसी में कुछ लोगों की राय है कि जब अगली बार खेल के नियमों की समीक्षा हो तो ओवरथ्रो के नियमों पर ध्यान दिया जाए, जो इसकी उप-समिति की जिम्मेदारी है.

फाइनल में इंग्लैंड को आखिरी ओवर में ओवरथ्रो से छह रन मिले थे. मार्टिन गुप्टिल का थ्रो बेन स्टोक्स के बल्ले से लगकर सीमा रेखा के पार चला गया था. इंग्लैंड ने मैच टाई कराया और फिर सुपर ओवर भी टाई छूटा जिसके बाद ‘बाउंड्री’ गिनती की गई और इंग्लैंड चैंपियन बन गया.

श्रीलंका के कुमार धर्मसेना और दक्षिण अफ्रीका के मारियास इरासमुस मैदानी अंपायर थे जिन्होंने इंग्लैंड को छह रन दिए थे. इस पर अब तक बहस गर्म है. ईसीसी के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर साइमन टफेल का कहना है कि यह बहुत खराब फैसला था और इंग्लैंड को छह नहीं बल्कि पांच रन दिये जाने चाहिए थे.

टीवी रीप्ले से साफ लग रहा था कि आदिल राशिद और स्टोक्स ने तब दूसरा रन पूरा नहीं किया था जब गुप्टिल ने थ्रो किया था. लेकिन फील्ड अंपायर कुमार धर्मसेना और मारियास इरासमुस ने इंग्लैंड के खाते में छह रन जोड़ दिए-चार रन बाउंड्री के और दो रन जो बल्लेबाजों ने दौड़कर लिये थे.