जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक का एक बयान विवादों में घिरता दिख रहा है. उन्होंने कहा है कि आतंकी सुरक्षाकर्मियों समेत बेगुनाहों की हत्या करना बंद करें और इसके बजाय उन लोगों को निशाना बनायें जिन्होंने कश्मीर को लूटा है. पीटीआई के मुताबिक करगिल में एक पर्यटन कार्यक्रम में सत्यपाल मलिक ने कहा, ‘ये लड़के जिन्होंने हथियार उठाए हैं वे अपने ही लोगों की हत्या कर रहे हैं. वे पीएसओ (निजी सुरक्षा अधिकारियों) और एसपीओ (विशेष पुलिस अधिकारियों) की हत्या कर रहे हैं. इनकी हत्या क्यों कर रहे हो? उनकी हत्या करो जिन्होंने कश्मीर की संपदा लूटी है. क्या तुमने इनमें से किसी को मारा है?’

सत्यपाल मलिक ने मुख्यधारा के नेताओं पर परोक्ष रूप से निशाना भी साधा. उनका कहना था कि ये नेता दिल्ली में अलग भाषा बोलते हैं और कश्मीर में कुछ और बोलते हैं. राज्यपाल के इस बयान की मुख्यधारा के नेताओं ने आलोचना की है. पूर्व मुख्यमंत्री और जम्मू कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘यह शख्स जो जाहिर तौर पर एक जिम्मेदार संवैधानिक पद पर काबिज है और वह आतंकवादियों को भ्रष्ट समझे जाने वाले नेताओं की हत्या के लिये कह रहा है.’ बाद में, उमर अब्दुला ने कहा, ‘इस ट्वीट को याद रखें - आज के बाद जम्मू-कश्मीर में किसी भी मुख्यधारा के नेता या सेवारत/सेवानिवृत्त नौकरशाह की अगर हत्या होती है तो समझा जायेगा कि यह जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के आदेशों पर की गयी है.’ उधर, राज्य कांग्रेस प्रमुख जीए मीर ने सवाल उठाया कि क्या राज्यपाल जंगल राज को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सत्यपाल मलिक जिस संवैधानिक पद पर हैं, उनका यह बयान उसकी गरिमा के खिलाफ है.

हालांकि सत्यपाल मलिक ने इसी आयोजन में फौरन यह भी कहा कि हथियार उठाना कभी भी किसी समस्या का हल नहीं हो सकता. उन्होंने श्रीलंका में लिट्टे का उदाहरण दिया. सत्यपाल मलिक का कहना था, ‘भारत सरकार कभी हथियारों के आगे घुटने नहीं टेकेगी.’