कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष रमेश कुमार ने एचडी कुमारस्वामी सरकार के विश्वासमत परीक्षण को लेकर लग रहे कयासों पर विराम लगा दिया है. उनका कहना है कि इस पर वोटिंग आज ही होगी. विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी कहा है कि सत्ताधारी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन से बगावत कर इस्तीफा दे चुके विधायकों पर भी पार्टी व्हिप लागू होगा. यानी इन विधायकों को सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में वोट देना होगा नहीं तो अयोग्य घोषित किए जाने का खतरा उठाना होगा. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इन विधायकों के लिए सदन की कार्रवाई में भाग लेना जरूरी नहीं है.

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि एचडी कुमारस्वामी आज अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या नहीं. 15 विधायकों की बगावत के चलते सरकार के पास 102 विधायक रह गए हैं जबकि विपक्षी भाजपा के पास 105 विधायक हैं और दो निर्दलीय विधायकों ने भी उसे समर्थन का ऐलान किया है. भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा कह चुके हैं कि आज कुमारस्वामी सरकार का आखिरी दिन है.

इस बीच मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बागी विधायकों से फिर वापस लौटने की अपील की है. एक चिट्ठी लिखकर उन्होंने कहा है कि ये विधायक विधानसभा में आएं और बताएं कि कैसे भाजपा ने लोकतंत्र को तार-तार किया है. इससे पहले कुमारस्वामी ने आरोप लगाया था कि उनके विधायकों को 40 से 50 करोड़ रु तक की रिश्वत की पेशकश की गई है. एचडी कुमारस्वामी ने बीते गुरुवार को विश्वासमत प्रस्ताव पेश किया था. लेकिन राज्यपाल द्वारा दो बार समयसीमा दिए जाने के बावजूद इस पर वोटिंग नहीं हो सकी.

इससे पहले खबर आई थी कि विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने सत्ताधारी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के बागी विधायकों को एक नोटिस जारी किया है. इसमें उनसे कहा गया है कि वे कल सुबह 11 बजे विधानसभा अध्यक्ष से मिलें. ये नोटिस गठबंधन के नेताओं की उस याचिका पर दिया गया है जिसमें इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है. कांग्रेस नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कहना है कि दल-बदल कानून के मुताबिक इन विधायकों के खिलाफ यह कार्रवाई की जानी चाहिए.

उधर, सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के दो निर्दलीय विधायकों की उस याचिका पर तुरंत सुनवाई से इंकार कर दिया है जिसमें अनुरोध किया गया था कि शीर्ष अदालत विधानसभा अध्यक्ष को तुरंत विश्वासमत परीक्षण का आदेश दे. इन विधायकों का कहना था कि विश्वासमत प्रस्ताव पेश किए जाने के बावजूद इस पर वोटिंग में जानबूझकर लंबा समय लगाया जा रहा है. याचिका में मांग की गई थी कि आज शाम पांच बजे तक वोटिंग के लिए कहा जाए. लेकिन अदालत ने कहा कि यह नामुमकिन है. सुप्रीम कोर्ट का यह भी कहना था कि इन विधायकों की इस याचिका पर कल सुनवाई हो सकती है.