प्रज्ञा ठाकुर के बयान पर फिर विवाद, कहा - नाली साफ करने के लिए सांसद नहीं बनीं, पार्टी ने ऐसे बयानों से बचने की नसीहत दी

अपने बयानों से कई बार विवादों में आ चुकीं प्रज्ञा सिंह ठाकुर को उनकी पार्टी भाजपा ने नसीहत दी है. बताया जा रहा है कि पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रज्ञा ठाकुर को कहा है कि उन्हें ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए. भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने कल भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ एक आयोजन के दौरान कहा था कि वे नाली-शौचालय साफ़ करवाने के लिए नहीं सांसद नहीं बनी हैं. उन्होंने ये बयान एक भाजपा कार्यकर्ता की शिकायत पर दिया था जिसमें उसने अपने इलाके में गंदगी का मुद्दा उठाया था. इससे पहले प्रज्ञा महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे पर दिए गए अपने बयान को लेकर चर्चा में आई थीं. लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने गोडसे को देशभक्त बताया था. इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था कि वे ऐसा बयान देने वाले को कभी माफ नहीं करेंगे

कर्नाटक में विश्वासमत को लेकर चल रहे कयासों पर विधानसभा अध्यक्ष ने विराम लगाया, कहा - इस पर वोटिंग आज ही होगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों को बधाई दी है. उन्होंने इसे भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि चंद्रयान 2 के सफल परीक्षण से आज पूरा देश गौरवान्वित है.

कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष रमेश कुमार ने एचडी कुमारस्वामी सरकार के विश्वासमत को लेकर लग रहे कयासों पर विराम लगा दिया है. उनका कहना है कि इस पर वोटिंग आज ही होगी. विधानसभा अध्यक्ष ने ये भी कहा है कि सत्ताधारी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन से बगावत कर इस्तीफा दे चुके विधायकों पर भी पार्टी व्हिप लागू होगा. यानी इन विधायकों को सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में वोट देना होगा नहीं तो अयोग्य घोषित किए जाने का खतरा उठाना होगा. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इन विधायकों के लिए सदन की कार्रवाई में भाग लेना जरूरी नहीं है. 15 विधायकों की बगावत के चलते सरकार के पास 102 विधायक रह गए हैं. उधर, विपक्षी भाजपा के पास 105 विधायक हैं और दो निर्दलीय विधायकों ने भी उसे समर्थन का ऐलान किया है. भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा कह चुके हैं कि आज कुमारस्वामी सरकार का आखिरी दिन है.

अंतरिक्ष में भारत की अब तक की सबसे बड़ी छलांग, चंद्रयान-2 सफलतापूर्वक लॉन्च

चंद्रयान-2 सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया है. भारत के इस सबसे महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियान को आज आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया. अभी तक सब कुछ योजना के मुताबिक ही चल रहा है. इससे पहले 15 जुलाई को तकनीकी गड़बड़ी के चलते इस अभियान की लॉन्चिंग अंतिम क्षणों में रोकनी पड़ी थी. चंद्रयान-2 दस साल के भीतर चंद्रमा पर भेजा जाने वाला दूसरा भारतीय अभियान है. इससे पहले भारत ने अक्टूबर 2008 में चंद्रयान-1 को चंद्रमा की कक्षा में भेजा था. चंद्रयान-2 की सफलता के साथ ही भारत... अमेरिका, रूस और चीन के बाद धरती के इस उपग्रह पर अंतरिक्ष यान उतारने वाला चौथा देश बन जाएगा.

आतंकियों से भ्रष्ट नेताओं को गोली मारने को कहने के बाद जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक की सफाई, इसे गुस्से और हताशा का नतीजा बताया

अपने बयान को लेकर जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक भी सुर्खियों में हैं. रविवार को करगिल में एक आयोजन में उन्होंने कहा कि आतंकी उन लोगों को निशाना बनायें जिन्होंने कश्मीर को लूटा है. राज्यपाल के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं. पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि एक संवैधानिक पद बैठा शख्स आतंकवादियों को भ्रष्ट समझे जाने वाले नेताओं की हत्या के लिये कह रहा है. उधर, राज्य कांग्रेस प्रमुख जीए मीर ने सवाल उठाया कि क्या राज्यपाल जंगलराज को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं. उधर, बढ़ती आलोचना के बाद सत्यपाल मलिक की सफाई आई है. उनका कहना है कि राज्यपाल होने के नाते उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था, लेकिन गुस्से और हताशा के चलते उनके मुंह से ऐसी बात निकल गई. हालांकि उनका ये भी कहना था कि उनकी निजी राय ऐसी ही है.

हांगकांग में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को चीन ने बिल्कुल भी बर्दाश्त न करने की बात कही

चीन ने हांगकांग में बढ़ते सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर भारी नाराजगी जताई है. चीनी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि इन्हें बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ये बयान तब आया जब आज इन प्रदर्शनकारियों ने हांगकांग में चीन के प्रतिनिधि के कार्यालय में हंगामा किया. हजारों लोगों ने इस कार्यालय को जाने वाली सड़क जाम कर दी और इसकी दीवारों पर अंडे समेत कई चीजें फेंकी. ये प्रदर्शन हांगकांग से चीन प्रत्यर्पण को आसान बनाने वाले एक विधेयक के चलते शुरू हुए थे. भारी विरोध के चलते प्रशासन को इस विधेयक से कदम पीछे खींचने पड़े. हालांकि प्रदर्शनकारी अब भी सड़कों पर हैं. अब उनकी मांगों के केंद्र में लोकतांत्रिक सुधार हैं.

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