कर्नाटक में एक और दिन विधानसभा में विश्वासमत परीक्षण के बिना गुजर गया. मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी द्वारा पेश विश्वास प्रस्ताव पर तीन दिन तक चर्चा के बाद भी विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने इस पर मतविभाजन के बगैर सदन को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया. अब सबकी नजरें आज पर हैं.

पीटीआई के मुताबिक सत्ताधारी कांग्रेस-जेडीएस के सदस्य इस पर अड़े रहे कि मतविभाजन सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक रुक सकता है. कांग्रेस ने एक याचिका दायर कर शीर्ष अदालत से 17 जुलाई के अपने उस फैसले को साफ करने के लिए कहा है जिसमें सरकार से बागी हो चुके विधायकों को सदन की कार्रवाई में हिस्सा लेने से छूट दी गई है. पार्टी का कहना है कि यह व्हिप जारी करने के उसके संवैधानिक अधिकार में दखल है.

आज ही सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक के उन दो निर्दलीय विधायकों की याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें विश्वास प्रस्ताव पर शक्तिपरीक्षण ‘तत्काल’ कराने का अनुरोध किया गया है. इन विधायकों का आरोप है कि इसमें जानबूझकर देर की जा रही है.

उधर, विधानसभा की कार्यवाही लंबी चलने की शिकायत के बीच अध्यक्ष रमेश कुमार ने स्पष्ट रूप से कहा कि मंगलवार को शाम चार बजे तक चर्चा समाप्त हो जाएगी और शाम छह बजे तक मतदान प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. उन्होंने आज बागी विधायकों को भी मिलने के लिए बुलाया है. उधर, मुंबई के एक होटल में ठहरे बागी विधायकों को चेतावनी देते हुए वरिष्ठ मंत्री डी के शिवकुमार ने उन्हें याद दिलाया कि यदि वे नोटिस के जवाब में आज विधानसभाध्यक्ष के सामने नहीं आए तो अयोग्य ठहराये जाने की कार्रवाई का सामना करेंगे. सत्तारूढ़ गठबंधन के 17 सहित 20 विधायकों ने सोमवार को सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया.