मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों और शिक्षा में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए मौजूदा 14 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 27 फीसदी करने के लिए संशोधन विधेयक मंगलवार को विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया.

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने विधानसभा में इसे मध्य प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षण) संशोधन विधेयक 2019 के रूप में पेश किया. नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का समर्थन करते हुए मांग की कि ओबीसी कोटे के अंदर क्रीमीलेयर की शुरुआत की जानी चाहिए ताकि इसका लाभ ओबीसी के उस गरीब वर्ग तक पहुंच सके जिसे कभी आरक्षण का लाभ ही नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण के अंदर ‘अति पिछड़ा वर्ग’ के लिए सात प्रतिशत कोटा निर्धारित किया जाना चाहिए.

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी पूछा कि जब नौकरी नहीं है तो यह आरक्षण ओबीसी के लिए कैसे फायदेमंद साबित होगा. उत्तर में सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री गोविंद सिंह ने कहा कि सरकारी निकायों, निगमों और स्थानीय निकायों में करीब 2.5 लाख नौकरियां उपलब्ध हैं, जिन्हें जल्द ही भर दिया जाएगा. मंत्री ने कहा कि इस संशोधन से प्रदेश में आरक्षण 73 प्रतिशत हो जाएगा, जिसमें अनारक्षित वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति के लिए 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण भी शामिल है. चर्चा के बाद सदन ने विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया. इस साल मार्च में लोकसभा चुनाव से पहले मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार ओबीसी कोटा बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का अध्यादेश लाई थी.